कटनी में दुर्गा उत्सव को लेकर प्रशासन सख्त: मिट्टी की प्रतिमाएं अनिवार्य, डीजे पर रहेगा प्रतिबंध
# कटनी में दुर्गा उत्सव को लेकर प्रशासन सख्त: मिट्टी की प्रतिमाएं अनिवार्य, डीजे पर रहेगा प्रतिबंध
**कटनी।** नवरात्रि एवं दुर्गा उत्सव को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल तरीके से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन ने आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कलेक्टर द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, दुर्गा उत्सव में मिट्टी से निर्मित प्रतिमाओं की स्थापना को अनिवार्य किया गया है, जबकि प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) से बनी प्रतिमाओं की स्थापना प्रतिबंधित रहेगी। इसके साथ ही दुर्गा प्रतिमा विसर्जन और पंडालों में डीजे के उपयोग पर भी रोक रहेगी।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सभी दुर्गा उत्सव एवं गरबा समितियों को संबंधित अनुविभागीय दंडाधिकारी (एसडीएम), पुलिस अधिकारियों अथवा थाना प्रभारी से आवश्यक अनुमति प्राप्त करनी होगी। पंडालों में सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी कैमरे, सुरक्षित विद्युत कनेक्शन और ध्वनि विस्तारक यंत्रों के नियमानुसार उपयोग पर विशेष ध्यान देना होगा।
वहीं, जवारा विसर्जन को लेकर भी प्रशासन ने व्यवस्था निर्धारित की है। 19 अक्टूबर को कटनी नदी के मोहन घाट, गाटर घाट सहित नगर निगम द्वारा निर्मित जलकुंडों में जवारा विसर्जन कराया जाएगा। नदियों, तालाबों और नालों में सीधे विसर्जन पर रोक रहेगी। प्रशासन का उद्देश्य धार्मिक आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और शहर की यातायात व्यवस्था को बनाए रखना है।
## दुर्गा प्रतिमाओं के लिए मिट्टी का उपयोग अनिवार्य
जिला प्रशासन के निर्देशों के अनुसार, नवरात्रि के दौरान स्थापित की जाने वाली दुर्गा प्रतिमाएं मिट्टी से निर्मित होनी चाहिए। पीओपी से बनी प्रतिमाओं की स्थापना प्रतिबंधित रहेगी। इस निर्देश का उद्देश्य प्रतिमा विसर्जन के दौरान जलस्रोतों पर पड़ने वाले पर्यावरणीय प्रभाव को कम करना है।
दुर्गा उत्सव समितियों से अपेक्षा की गई है कि वे प्रतिमा निर्माण और स्थापना के समय निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करें। प्रतिमा स्थापना से पहले आयोजन स्थल का चयन सावधानीपूर्वक किया जाए, ताकि श्रद्धालुओं की आवाजाही और सामान्य यातायात प्रभावित न हो।
### दुर्गा उत्सव समितियों को लेनी होगी अनुमति
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि दुर्गा उत्सव और गरबा आयोजित करने वाली समितियों को संबंधित अनुविभागीय दंडाधिकारी, पुलिस अधिकारियों या थाना प्रभारी से आवश्यक अनुमति लेनी होगी।
बिना आवश्यक अनुमति के आयोजन करने से बचने और निर्धारित नियमों का पालन करने की अपील की गई है। समितियों को आयोजन स्थल, पंडाल की व्यवस्था, विद्युत कनेक्शन और सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं पर विशेष ध्यान देना होगा।
## पंडालों में सीसीटीवी और सुरक्षित बिजली व्यवस्था जरूरी
दुर्गा पंडालों में श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने सीसीटीवी कैमरे लगाने और सुरक्षित विद्युत कनेक्शन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। धार्मिक आयोजनों के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने की संभावना रहती है। ऐसे में बिजली से संबंधित दुर्घटनाओं, अव्यवस्था और अन्य अप्रिय घटनाओं को रोकने के लिए सावधानी बरतना आवश्यक है।
आयोजन समितियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि विद्युत तार सुरक्षित तरीके से लगाए जाएं और पंडाल में आने-जाने के रास्तों पर अनावश्यक अवरोध न हों। प्रतिमाओं और पंडालों की स्थापना हाईटेंशन बिजली लाइनों तथा विद्युत खंभों के आसपास असुरक्षित तरीके से नहीं की जानी चाहिए।
## डीजे प्रतिबंधित, केवल भक्ति गीतों की अनुमति
दुर्गा उत्सव के दौरान ध्वनि प्रदूषण और सार्वजनिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने डीजे के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया है। निर्देशों के अनुसार, प्रतिमा विसर्जन और पंडालों में डीजे नहीं बजाया जा सकेगा।
साउंड बॉक्स पर केवल भक्ति एवं धार्मिक गीत बजाने की अनुमति संबंधी व्यवस्था निर्धारित की गई है। ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग के लिए आवश्यक अनुमति लेना अनिवार्य होगा। आपत्तिजनक गीतों, नारेबाजी और प्रतिबंधित गतिविधियों पर भी रोक रहेगी।
धार्मिक आयोजन के दौरान ध्वनि की मर्यादा बनाए रखना आवश्यक है, ताकि आसपास रहने वाले नागरिकों, बुजुर्गों, बच्चों और मरीजों को परेशानी न हो। आयोजन समितियों से अपेक्षा है कि वे प्रशासन के निर्देशों का पालन करते हुए धार्मिक कार्यक्रमों को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराएं।
## चल समारोह में लाठी-डंडे और अस्त्र-शस्त्र पर रोक
प्रशासन ने दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान निकलने वाले चल समारोहों को लेकर भी निर्देश जारी किए हैं। चल समारोह में लाठी-डंडे एवं अस्त्र-शस्त्र का उपयोग प्रतिबंधित रहेगा।
समितियों को जुलूस के दौरान अनुशासन बनाए रखने, निर्धारित मार्ग का पालन करने और किसी भी प्रकार की ऐसी गतिविधि से बचने की जरूरत है, जिससे शांति व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। पुलिस और प्रशासन की ओर से निर्धारित व्यवस्थाओं में सहयोग करना भी आयोजकों की जिम्मेदारी होगी।
## 19 अक्टूबर को निर्धारित जलकुंडों में होगा जवारा विसर्जन
जवारा विसर्जन के लिए जिला प्रशासन ने विशेष व्यवस्था निर्धारित की है। जारी निर्देशों के अनुसार, 19 अक्टूबर को कटनी नदी के मोहन घाट, गाटर घाट सहित नगर निगम द्वारा निर्मित जलकुंडों पर जवारा विसर्जन किया जाएगा।
शहर में निर्धारित विसर्जन स्थलों पर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की तैयारी की जाएगी, ताकि श्रद्धालु सुरक्षित तरीके से धार्मिक परंपराओं का निर्वहन कर सकें। ग्रामीण क्षेत्रों में भी जनपद पंचायतों और नगर परिषदों के सहयोग से आवश्यकतानुसार जलकुंड बनाए जाएंगे।
इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य विसर्जन के दौरान भीड़ को नियंत्रित करना, दुर्घटनाओं की आशंका कम करना और जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाना है।
### नदियों, तालाबों और नालों में सीधे विसर्जन पर रोक
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नदियों, तालाबों और नालों में सीधे जवारा विसर्जन नहीं किया जाएगा। श्रद्धालुओं को निर्धारित जलकुंडों का ही उपयोग करना होगा।
शहरी क्षेत्र के कटाये घाट और अमीरगंज तालाब में अधिक जलभराव एवं दुर्घटना की आशंका को देखते हुए जवारा और प्रतिमा विसर्जन प्रतिबंधित रहेगा। संबंधित अधिकारियों को इन संवेदनशील स्थानों पर प्रतिबंधात्मक आदेश जारी करने और उनका पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं।
श्रद्धालुओं से अपील है कि वे प्रतिबंधित स्थानों पर विसर्जन करने का प्रयास न करें और प्रशासन द्वारा निर्धारित वैकल्पिक स्थलों पर ही पहुंचें।
## विसर्जन स्थलों पर पुलिस, प्रकाश और एसडीआरएफ की व्यवस्था
जवारा एवं प्रतिमा विसर्जन के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विसर्जन स्थलों पर साफ-सफाई, पर्याप्त प्रकाश, पेयजल और पुलिस बल की व्यवस्था की जाएगी। आवश्यकता के अनुसार राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) की तैनाती भी की जाएगी।
विसर्जन जुलूसों के मार्ग पहले से निर्धारित किए जाएंगे। इसके लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठ नागरिकों और आयोजन समितियों के साथ समन्वय स्थापित किया जाएगा, जिससे जुलूस व्यवस्थित तरीके से निकल सकें और किसी प्रकार की अव्यवस्था की स्थिति न बने।
प्रशासन की प्राथमिकता रहेगी कि धार्मिक आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं को आवश्यक सुविधाएं मिलें और सुरक्षा संबंधी निर्देशों का प्रभावी ढंग से पालन हो।
## श्रद्धालुओं और आयोजन समितियों से सहयोग की अपील
कटनी में दुर्गा उत्सव और जवारा विसर्जन को सुरक्षित बनाने के लिए प्रशासनिक निर्देशों का पालन करना सभी की जिम्मेदारी है। आयोजन समितियों को समय रहते आवश्यक अनुमतियां प्राप्त करनी चाहिए और पंडालों में सुरक्षा के इंतजाम पूरे रखने चाहिए।
श्रद्धालुओं को भी निर्धारित विसर्जन स्थलों का उपयोग करने, प्रतिबंधित स्थानों से दूर रहने और जुलूस के दौरान अनुशासन बनाए रखने की जरूरत है। मिट्टी की प्रतिमाओं की स्थापना, डीजे पर प्रतिबंध और सुरक्षित विसर्जन की व्यवस्था धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण एवं जनसुरक्षा को प्राथमिकता देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
**प्रशासन की अपील है कि सभी समितियां और नागरिक नियमों का पालन करते हुए दुर्गा उत्सव को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने में सहयोग करें।**
**दिनांक:** 14 अक्टूबर 2026
**समय:** रात्रि 10:00 बजे (IST)
**स्थान:** कटनी, मध्य प्रदेश
कटनी दुर्गा उत्सव 2026 में मिट्टी की प्रतिमाओं की स्थापना, डीजे प्रतिबंध और 19 अक्टूबर को निर्धारित जलकुंडों में जवारा विसर्जन के प्रशासनिक निर्देश।
कटनी में दुर्गा उत्सव के लिए मिट्टी की प्रतिमाएं अनिवार्य, डीजे प्रतिबंधित और 19 अक्टूबर को निर्धारित जलकुंडों में जवारा विसर्जन के निर्देश जारी किए गए।
दुर्गा उत्सव 2026: मिट्टी की प्रतिमा अनिवार्य, डीजे पर रोक
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**Written & Edited By: ADIL AZIZ**
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