अंतर्राष्ट्रीय बाघ तस्कर ताशी शेरपा की सजा बरकरार, नर्मदापुरम कोर्ट ने अपील खारिज की
नर्मदापुरम जिला एवं सत्र न्यायालय का फैसला, 5 वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार अर्थदंड की सजा कायम
Bhopal | 23 सितंबर 2026 | रात 11:26 बजे IST
ताशी शेरपा, बाघ तस्करी, अंतर्राष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी, नर्मदापुरम कोर्ट, MPSTSF, बाघ की हड्डियों की तस्करी
नर्मदापुरम जिला एवं सत्र न्यायालय ने अंतर्राष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी से जुड़े मामले में ताशी शेरपा की अपील खारिज करते हुए 5 वर्ष के सश्रम कारावास और ₹10 हजार के अर्थदंड की सजा बरकरार रखी है। मध्यप्रदेश स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (STSF) के अनुसार न्यायालय ने 17 सितंबर 2026 को यह निर्णय सुनाया। मामला सतपुड़ा टाइगर रिजर्व क्षेत्र में बाघ के अवैध शिकार और उसके अंगों की अंतर्राष्ट्रीय तस्करी से जुड़ा है।
STSF की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार यह संगठन मध्यप्रदेश वन विभाग के अधीन कार्य करता है और वन्यजीव अपराधों, बाघ संरक्षण तथा अवैध शिकार एवं तस्करी से जुड़े मामलों में कार्रवाई करता है। (State Tiger Strike Force)
ताशी शेरपा की अपील हुई खारिज
नर्मदापुरम जिला एवं सत्र न्यायालय के समक्ष ताशी शेरपा ने पूर्व में सुनाई गई सजा के खिलाफ अपील प्रस्तुत की थी। विस्तृत सुनवाई के बाद अदालत ने अपील को खारिज कर दिया और पहले से निर्धारित 5 वर्ष के सश्रम कारावास तथा 10 हजार के अर्थदंड की सजा को प्रभावी रखा।
STSF की ओर से प्रस्तुत मौखिक, दस्तावेजी और वैज्ञानिक साक्ष्यों को मामले में महत्वपूर्ण माना गया। आधिकारिक जानकारी के अनुसार जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर अभियोजन पक्ष ने ताशी शेरपा की भूमिका को वन्यजीव तस्करी नेटवर्क से जोड़ा था। (करमवीर भारत)
2015 में सामने आया था बाघ शिकार और तस्करी का मामला
मामले की शुरुआत जुलाई 2015 में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व, नर्मदापुरम क्षेत्र में बाघ के अवैध शिकार और बाघ की हड्डियों की तस्करी से जुड़े प्रकरण से हुई थी।
जांच आगे बढ़ने पर मामला केवल स्थानीय शिकार तक सीमित नहीं रहा। STSF की जांच में वन्यजीवों के अंगों की तस्करी से जुड़े एक संगठित नेटवर्क की जानकारी सामने आई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार इस नेटवर्क में बाघ और पैंगोलिन से जुड़े अवैध व्यापार के आरोप भी सामने आए थे। (The Times of India)
STSF ने जांच के दौरान अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया। उपलब्ध विवरण के अनुसार इस मामले में कुल 30 लोगों की गिरफ्तारी हुई थी और दिसंबर 2022 में नर्मदापुरम के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत ने 27 आरोपियों को दोषी ठहराकर 5-5 वर्ष की सजा सुनाई थी। (NDTV MPCG)
करीब नौ साल बाद पकड़ा गया था ताशी शेरपा
मामले में ताशी शेरपा लंबे समय तक जांच एजेंसियों की पकड़ से बाहर रहा। जनवरी 2024 में मध्यप्रदेश स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) की संयुक्त कार्रवाई में उसे पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी-पानीटंकी क्षेत्र के पास पकड़ा गया था। विभिन्न रिपोर्टों में गिरफ्तारी की तारीख 24 और 25 जनवरी 2024 के रूप में दर्ज की गई है, इसलिए इस खबर में गिरफ्तारी को जनवरी 2024 की कार्रवाई के रूप में उल्लेखित किया जा रहा है। (Siliguri Times)
गिरफ्तारी के बाद उसे ट्रांजिट रिमांड पर मध्यप्रदेश लाया गया और मामले की आगे की जांच की गई। STSF की कार्रवाई में WCCB समेत अन्य एजेंसियों के सहयोग का भी उल्लेख किया गया है। (The Times of India)
जांच में वैज्ञानिक और साइबर साक्ष्यों का इस्तेमाल
इस मामले की जांच में पारंपरिक पुलिस जांच के साथ वैज्ञानिक और डिजिटल साक्ष्यों का भी उपयोग किया गया। STSF के अनुसार ताशी शेरपा से संबंधित मामले में ब्रेन इलेक्ट्रिकल ऑसिलेशन सिग्नेचर यानी BEOS और अन्य परीक्षणों से जुड़ी प्रक्रिया अपनाई गई थी।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार जांच एजेंसियों ने साइबर डेटा और अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों को भी जांच का हिस्सा बनाया। (The Times of India)
हालांकि किसी भी वैज्ञानिक परीक्षण के परिणाम को अकेले दोषसिद्धि का आधार मानना उचित नहीं होगा। इस मामले में अदालत के सामने अभियोजन द्वारा प्रस्तुत समग्र मौखिक, दस्तावेजी और वैज्ञानिक साक्ष्यों का मूल्यांकन किया गया और इसके बाद सजा कायम रहने का फैसला आया। (करमवीर भारत)
भारत से नेपाल, भूटान और चीन तक नेटवर्क के आरोप
जांच एजेंसियों के अनुसार ताशी शेरपा को ऐसे नेटवर्क की महत्वपूर्ण कड़ी माना गया, जिसके संपर्क भारत के अलावा नेपाल, भूटान और चीन तक बताए गए। STSF और पूर्व की मीडिया रिपोर्टों में वन्यजीवों के अंगों की अंतर्राष्ट्रीय तस्करी से जुड़े नेटवर्क का उल्लेख किया गया है। (NDTV MPCG)
इसी वजह से यह मामला केवल बाघ के अवैध शिकार का स्थानीय प्रकरण नहीं रहा, बल्कि सीमा पार वन्यजीव तस्करी के पहलू से भी जुड़ गया। इंटरपोल और WCCB जैसी एजेंसियों के साथ सहयोग का उल्लेख भी जांच के संदर्भ में सामने आया है। (The Times of India)
बाघों और वन्यजीव संरक्षण के लिए क्यों महत्वपूर्ण है मामला?
बाघ के अंगों की अवैध तस्करी वन्यजीव संरक्षण के सामने गंभीर चुनौती है। बाघ भारत में संरक्षित वन्यजीव है और उसके शिकार, अंगों की खरीद-बिक्री तथा अवैध व्यापार पर कानून के तहत कार्रवाई की जाती है।
STSF की आधिकारिक वेबसाइट पर Acts & Rules, Court Ruling, Judgement, SOP और Alert/Advisory जैसे अलग-अलग सेक्शन उपलब्ध हैं। वन्यजीव अपराध से संबंधित आधिकारिक जानकारी के लिए इन स्रोतों का उपयोग किया जा सकता है। (State Tiger Strike Force)
आधिकारिक स्रोत: State Tiger Strike Force Madhya Pradesh
वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो: Wildlife Crime Control Bureau (WCCB)
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण: National Tiger Conservation Authority (NTCA)
वन्यजीव तस्करी के खिलाफ कार्रवाई का सिलसिला जारी
ताशी शेरपा मामले के फैसले के बीच मध्यप्रदेश में वन्यजीव अपराधों के खिलाफ STSF की कार्रवाई जारी है। सितंबर 2026 में STSF की आधिकारिक प्रेस रिलीज सूची में बाघ, तेंदुए, पैंगोलिन और अन्य वन्यजीवों से जुड़े मामलों में गिरफ्तारी तथा न्यायालयों में जमानत याचिकाओं से संबंधित कई कार्रवाइयां दर्ज हैं। (State Tiger Strike Force)
हाल में STSF ने वन्यजीव तस्करी से संबंधित कई मामलों में न्यायालयीन कार्रवाई की जानकारी भी जारी की है। इससे पता चलता है कि वन्यजीव अपराधों में जांच के साथ-साथ अभियोजन और न्यायालयीन पैरवी पर भी ध्यान दिया जा रहा है। (State Tiger Strike Force)
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अदालत के फैसले का क्या मतलब है?
17 सितंबर 2026 के फैसले के बाद उपलब्ध जानकारी के अनुसार ताशी शेरपा के खिलाफ पहले से निर्धारित 5 वर्ष के सश्रम कारावास और ₹10 हजार अर्थदंड की सजा बरकरार है। यानी अपील के स्तर पर निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा में बदलाव नहीं हुआ। (करमवीर भारत)
यह फैसला उस मामले की न्यायिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण है, जिसकी जांच 2015 में शुरू हुई थी और जिसमें वर्षों बाद मुख्य आरोपियों में शामिल ताशी शेरपा की गिरफ्तारी हुई। मामले की जांच में अंतर्राष्ट्रीय संपर्क, वन्यजीव अपराध और वैज्ञानिक साक्ष्यों जैसे कई पहलू सामने आए।
वन्यजीव तस्करी से जुड़े मामलों में अदालत का अंतिम निर्णय उपलब्ध साक्ष्यों और लागू कानूनों के आधार पर होता है। इसलिए किसी आरोपी की भूमिका के बारे में रिपोर्टिंग करते समय न्यायालय द्वारा स्थापित तथ्यों और आधिकारिक रिकॉर्ड को आधार बनाना महत्वपूर्ण है।
नर्मदापुरम कोर्ट ने ताशी शेरपा की अपील खारिज कर 5 वर्ष के सश्रम कारावास और ₹10 हजार जुर्माने की सजा बरकरार रखी। वन्यजीव तस्करी मामले में फैसला सुनाया गया है।
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ताशी शेरपा बाघ तस्करी मामले में नर्मदापुरम जिला एवं सत्र न्यायालय का फैसला |
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Written & Edited By : ADIL AZIZ
(जनहित की बात, पत्रकारिता के साथ) PUBLIC SAB JANTI HAI
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Date & Time : 23 September 2026 | 11:26 PM IST


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