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स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स की बड़ी कार्रवाई: वन्यजीव तस्करी गिरोह का 8वां आरोपी गिरफ्तार, संरक्षित दुर्लभ पक्षियों की तस्करी का मामला





 स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स वन्यजीव तस्करी गिरोह

 स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स ने वन्यजीव तस्करी गिरोह के 8वें आरोपी को किया गिरफ्तार

स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स ने वन्यजीव तस्करी गिरोह के 8वें आरोपी को अहमदाबाद से गिरफ्तार किया। संरक्षित दुर्लभ पक्षियों की तस्करी मामले में पूछताछ जारी।

वन्यजीव तस्करी गिरोह का 8वां आरोपी गिरफ्तार

Published : 20 जुलाई 2026
 12:55 PM (IST)


स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स ने वन्यजीव तस्करी गिरोह के 8वें आरोपी को अहमदाबाद से किया गिरफ्तार

कटनी | 20 जुलाई 2026। वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (एसटीएसएफ), इंदौर इकाई ने संगठित वन्यजीव तस्करी गिरोह के आठवें आरोपी को गुजरात के अहमदाबाद से गिरफ्तार किया है। आरोपी पिछले तीन वर्षों से फरार चल रहा था और उसके खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत दर्ज मामले में लगातार तलाश की जा रही थी।

एसटीएसएफ को 19 जुलाई 2026 को मुखबिर से मिली सटीक सूचना के आधार पर अहमदाबाद निवासी आशीष (पिता: विनोद) को गिरफ्तार करने में सफलता मिली। विशेष न्यायालय, इंदौर की अनुमति के बाद आरोपी को फॉरेस्ट रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि पूछताछ में वन्यजीव तस्करी के नेटवर्क से जुड़े कई अहम खुलासे हो सकते हैं।


तीन साल से फरार था आरोपी, अब एसटीएसएफ के शिकंजे में

वन अपराध प्रकरण 20 मई 2023 को दर्ज किया गया था। इस मामले में पहले ही सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका था, जबकि आठवां आरोपी लगातार फरार चल रहा था।

एसटीएसएफ की विशेष टीम लगातार उसकी तलाश में विभिन्न राज्यों में अभियान चला रही थी। मुखबिर की सूचना के आधार पर टीम ने अहमदाबाद में दबिश देकर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।


क्या है पूरा मामला?

मई 2023 में स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स, इंदौर ने एक संगठित वन्यजीव तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ किया था। कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में संरक्षित दुर्लभ पक्षियों को अवैध रूप से रखा गया था।

जब्ती के दौरान बरामद किए गए—

  • 35 प्लम-हेडेड पैराकीट (Plum-headed Parakeet)
  • 16 रोज-रिंग्ड पैराकीट (Rose-ringed Parakeet)

ये दोनों प्रजातियां वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-II के अंतर्गत संरक्षित हैं। इनका अवैध व्यापार कानूनन दंडनीय अपराध है।


संरक्षित पक्षियों की तस्करी क्यों है गंभीर अपराध?

भारत में कई पक्षी एवं वन्यजीव जैव विविधता का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनके अवैध शिकार और तस्करी से पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित होता है।

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत—

  • संरक्षित प्रजातियों का शिकार प्रतिबंधित है।
  • खरीद-बिक्री और परिवहन अवैध है।
  • दोषी पाए जाने पर जेल और आर्थिक दंड का प्रावधान है।

वन्यजीव तस्करी केवल पर्यावरण ही नहीं बल्कि संगठित अपराध से भी जुड़ी चुनौती मानी जाती है।


एसटीएसएफ की लगातार कार्रवाई से तस्करों पर शिकंजा

स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स पिछले कई वर्षों से मध्यप्रदेश सहित अन्य राज्यों में वन्यजीव अपराधों पर निगरानी रख रही है।

इस प्रकरण में—

  • सात आरोपी पहले गिरफ्तार हो चुके थे।
  • आठवें आरोपी की गिरफ्तारी के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा था।
  • अब सभी प्रमुख आरोपियों तक जांच एजेंसियां पहुंच चुकी हैं।

पूछताछ के दौरान गिरोह के अन्य संपर्कों और संभावित नेटवर्क की भी जांच की जा रही है।


फॉरेस्ट रिमांड में होगी गहन पूछताछ

गिरफ्तार आरोपी को विशेष न्यायालय, इंदौर से अनुमति मिलने के बाद फॉरेस्ट रिमांड पर लिया गया है।

जांच अधिकारी यह पता लगाने का प्रयास करेंगे—

संभावित जांच बिंदु

  • पक्षियों की खरीद-बिक्री का नेटवर्क
  • अन्य राज्यों से जुड़े संपर्क
  • तस्करी के तरीके
  • आर्थिक लेनदेन
  • गिरोह में शामिल अन्य लोगों की भूमिका

प्लम-हेडेड पैराकीट और रोज-रिंग्ड पैराकीट क्यों हैं खास?

प्लम-हेडेड पैराकीट

  • आकर्षक रंगों वाला दुर्लभ तोता
  • भारतीय उपमहाद्वीप में पाया जाता है
  • अवैध पालतू व्यापार में इसकी मांग रहती है

रोज-रिंग्ड पैराकीट

  • भारत में व्यापक रूप से पाया जाने वाला तोता
  • वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित
  • बिना वैधानिक अनुमति व्यापार पूर्णतः प्रतिबंधित

वन्यजीव संरक्षण के लिए आम नागरिकों की भूमिका

यदि किसी व्यक्ति को—

  • वन्यजीवों की अवैध बिक्री,
  • दुर्लभ पक्षियों की तस्करी,
  • अवैध परिवहन,
  • या वन्यजीव अपराध की जानकारी मिले,

तो तत्काल वन विभाग या संबंधित पुलिस अधिकारियों को सूचना देना चाहिए।

समय पर दी गई सूचना कई दुर्लभ प्रजातियों का जीवन बचा सकती है।


वन्यजीव संरक्षण अधिनियम क्या कहता है?

भारत का वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 वन्यजीवों, पक्षियों और उनके प्राकृतिक आवास की सुरक्षा के लिए बनाया गया है।

इसके तहत—

  • संरक्षित प्रजातियों का व्यापार प्रतिबंधित है।
  • अवैध कब्जा अपराध है।
  • दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाती है।
  • संगठित वन्यजीव अपराधों पर विशेष निगरानी रखी जाती है।


"स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स द्वारा वन्यजीव तस्करी गिरोह के आरोपी की गिरफ्तारी का सांकेतिक चित्र"
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Written & Edited By : ADIL AZIZ

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