रीवा के श्याम शाह मेडिकल कॉलेज में छात्रों का बवाल: प्रथम वर्ष के दो गुटों में जमकर मारपीट, सीनियर भी हुए शामिल
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रीवा।
मध्यप्रदेश के रीवा स्थित प्रतिष्ठित श्याम शाह मेडिकल कॉलेज से एक चिंताजनक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसने न केवल कॉलेज प्रशासन बल्कि पूरे शहर को हैरानी में डाल दिया है। देश के भविष्य के डॉक्टर बनने की राह पर चल रहे मेडिकल छात्रों के बीच आज प्रथम वर्ष के छात्रों के दो गुटों में जमकर मारपीट हो गई। यह विवाद इतना बढ़ गया कि सीनियर छात्र भी इसमें शामिल हो गए और हालात काबू से बाहर हो गए। घटना के बाद अमहिया थाना पुलिस और कॉलेज प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा।
छोटी सी बात बनी बड़े बवाल की वजह
जानकारी के अनुसार, विवाद की शुरुआत बेहद मामूली बात को लेकर हुई। श्याम शाह मेडिकल कॉलेज के प्रथम वर्ष के छात्र रोज़ की तरह कॉलेज पहुंचे थे। इनमें से एक गुट, जो कॉलेज कैंपस के बाहर रहकर पढ़ाई करता है, उसने आज क्लास बंक करने का निर्णय लिया। वहीं हॉस्टल कैंपस में रहने वाले छात्रों ने साफ कहा कि वे रोज़ की तरह आज भी कक्षा में जाएंगे।
बस इसी बात को लेकर दोनों गुटों के बीच पहले कहासुनी हुई, जो देखते ही देखते विवाद और फिर हिंसक झड़प में बदल गई।
लाठी, डंडे और घूंसे: कैंपस बना रणक्षेत्र
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विवाद इतना बढ़ गया कि छात्रों ने एक-दूसरे पर लाठी, डंडे, लात-घूंसे बरसाने शुरू कर दिए। जिसके हाथ में जो आया, उसने उसी से हमला किया। मेडिकल कॉलेज जैसा अनुशासित और शैक्षणिक माहौल कुछ ही देर में रणक्षेत्र में तब्दील हो गया।
वीडियो फुटेज में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि छात्र गुटों में बंटकर एक-दूसरे पर हमला कर रहे हैं, मानो किसी को किसी का डर ही न हो।
सीनियर छात्रों की एंट्री, मामला और बिगड़ा
हंगामे की सूचना मिलने पर सीनियर छात्र भी मौके पर पहुंचे। शुरुआत में उन्होंने प्रथम वर्ष के छात्रों को समझाने की कोशिश की, लेकिन स्थिति नियंत्रण में आने के बजाय और बिगड़ गई।
आरोप है कि समझाइश के बाद सीनियर छात्र भी आपस में हुई मारपीट में शामिल हो गए, जिससे झगड़ा और उग्र हो गया। इस दौरान कॉलेज परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
पुलिस और कॉलेज प्रशासन ने संभाला मोर्चा
हंगामे की सूचना मिलते ही अमहिया थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस के साथ-साथ श्याम शाह मेडिकल कॉलेज के डीन और अस्पताल प्रबंधन भी तुरंत कैंपस में पहुंचे।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सभी छात्रों को कॉलेज परिसर के अंदर ले जाया गया और तीनों गुटों को अलग-अलग बैठाया गया। इसके बाद छात्रों को शांत कर समझाइश दी गई, ताकि मामला और न बढ़े।
कॉलेज प्रबंधन की पहल: आपसी समझाइश से सुलझाने की कोशिश
कॉलेज प्रबंधन ने फिलहाल इस मामले में पुलिस में किसी प्रकार की लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई है। प्रबंधन का कहना है कि यह मामला आपसी समझाइश से ही सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रबंधन के अनुसार, यह छात्रों के भविष्य का सवाल है। ये छात्र आने वाले समय में डॉक्टर बनकर देश और समाज की सेवा करेंगे, इसलिए किसी भी तरह की कठोर कार्रवाई से पहले सोच-समझकर कदम उठाया जा रहा है।
डीन का बयान
श्याम शाह चिकित्सा महाविद्यालय के डीन सुनील अग्रवाल ने बताया कि कॉलेज प्रशासन स्थिति पर पूरी नजर बनाए हुए है। छात्रों को समझाइश दी जा रही है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो।
उन्होंने कहा कि मेडिकल छात्रों से इस तरह के आचरण की उम्मीद नहीं की जाती और अनुशासन बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
पुलिस का पक्ष
अमहिया थाना प्रभारी शिव अग्रवाल ने बताया कि पुलिस को सूचना मिलने पर तत्काल मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया गया।
फिलहाल कॉलेज प्रबंधन की ओर से कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। यदि शिकायत मिलती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
नीट पास करने वाले छात्रों का ऐसा व्यवहार, कई सवाल
यह घटना इसलिए भी ज्यादा चिंताजनक है क्योंकि ये सभी छात्र नीट जैसी कठिन परीक्षा पास कर मेडिकल कॉलेज में दाखिला पाने वाले हाई मेरिट स्टूडेंट हैं।
जिन छात्रों से समाज को संवेदनशीलता, जिम्मेदारी और अनुशासन की उम्मीद होती है, उनके द्वारा इस तरह की मारपीट और हिंसा का प्रदर्शन कई सवाल खड़े करता है।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि छात्रों के बीच जमकर मारपीट हो रही है और उन्हें रोकने वाला कोई नहीं है।
लोग सोशल मीडिया पर इस घटना की कड़ी आलोचना कर रहे हैं और मेडिकल शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन पर सवाल उठा रहे हैं।
श्याम शाह मेडिकल कॉलेज की यह घटना केवल एक कॉलेज का मामला नहीं है, बल्कि यह युवा पीढ़ी में बढ़ते तनाव, अनुशासनहीनता और संवाद की कमी को भी दर्शाती है।
मेडिकल छात्र समाज की रीढ़ होते हैं। उनसे हिंसा नहीं, बल्कि संयम और समझदारी की उम्मीद की जाती है।
अब जरूरत इस बात की है कि कॉलेज प्रशासन, छात्र और अभिभावक मिलकर इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाएं, ताकि भविष्य के डॉक्टर अपने लक्ष्य से न भटकें।
Written & Edited By : ADIL AZIZ
(जनहित की बात, पत्रकारिता के साथ)
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