महापौर जनसुनवाई में उठा आवासीय योजना क्रमांक-15 जमीन घोटाले का मामला, कार्रवाई की मांग
कटनी जमीन घोटाला | आवासीय योजना क्रमांक 15 | नगर निगम कटनी
कटनी।
नगर निगम कटनी की बहुचर्चित और अति महत्वाकांक्षी आवासीय योजना क्रमांक-15 एक बार फिर विवादों में घिर गई है। नगर निगम द्वारा आम जनता को रियायती दरों पर आवासीय भू-खंड उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना की अधिग्रहित भूमि को लेकर जमीन घोटाले के गंभीर आरोप सामने आए हैं। यह मामला मंगलवार को आयोजित महापौर जनसुनवाई में जोर-शोर से उठाया गया, जिससे नगर प्रशासन में हलचल मच गई।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमल पांडे ने लगाए गंभीर आरोप
महापौर जनसुनवाई के दौरान वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमल पांडे ने महापौर प्रीति सूरी को लिखित शिकायत सौंपते हुए आरोप लगाया कि नगर सुधार न्यास कटनी (अब नगर निगम कटनी) द्वारा अधिग्रहित की गई आवासीय योजना क्रमांक-15 की पूरी भूमि को सुनियोजित षड्यंत्र के तहत खुर्द-बुर्द किया गया है। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि इस पूरे मामले में राजनीतिक दबाव, प्रशासनिक मिलीभगत और भ्रष्टाचार की भूमिका स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
कमल पांडे ने बताया कि योजना क्रमांक-15 की भूमि को आम नागरिकों के लिए सुरक्षित रखने के बजाय, प्रभावशाली लोगों द्वारा अपने पद और रसूख का उपयोग कर पारिवारिक कंपनियों के नाम पर अवैध रूप से क्रय किया गया।
तीन बार आयुक्त को दी शिकायत, नहीं हुई कार्रवाई
शिकायतकर्ता ने जनसुनवाई में यह भी बताया कि उन्होंने इस गंभीर मामले को लेकर
29 सितंबर 2025
10 नवंबर 2025
16 दिसंबर 2025
को नगर निगम कटनी की आयुक्त तपस्या परिहार के समक्ष दस्तावेजों सहित लिखित शिकायतें प्रस्तुत की थीं, लेकिन आज तक किसी भी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की गई। आरोप है कि राजनीतिक दबाव के चलते पूरा मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
इतना ही नहीं, 11 दिसंबर 2025 को सीएम हेल्पलाइन में भी शिकायत दर्ज कराई गई, लेकिन वहां से भी कोई प्रभावी कार्रवाई सामने नहीं आई।
योजना क्रमांक-15 का इतिहास और उद्देश्य
शिकायत में बताया गया कि वर्ष 1987 में तत्कालीन नगर सुधार न्यास कटनी के अध्यक्ष सत्येंद्र पाठक द्वारा इस योजना की शुरुआत की गई थी। इसका उद्देश्य कटनी शहर के आम नागरिकों को कम कीमत पर आवासीय भू-खंड उपलब्ध कराना था।
इस योजना के अंतर्गत कुल 311 आवासीय भू-खंड विभिन्न वर्गों के लिए प्रस्तावित किए गए थे। इसके लिए ग्राम झिंझरी और ग्राम अमकुही की कुल 8.253 हेक्टेयर (लगभग 20.50 एकड़) भूमि का अधिग्रहण नगर सुधार न्यास अधिनियम 1956 की धारा 71(1) के तहत किया गया था।
मुआवजा भुगतान के बाद भी भूमि पर कब्जा
शिकायतकर्ता के अनुसार, योजना की भूमि अधिग्रहण के एवज में कुल 11,42,925 रुपये का मुआवजा निर्धारित हुआ था, जिसमें से 4,98,500 रुपये का भुगतान 1991-92 में तत्कालीन भू-स्वामियों को किया जा चुका था। इसके बावजूद भूमि को नगर निगम के रिकॉर्ड से बाहर कर निजी स्वामित्व में दिखाया गया, जो गंभीर अनियमितता को दर्शाता है।
नगर निगम की चेतावनी के बावजूद हुई रजिस्ट्रियां
कमल पांडे ने बताया कि वर्ष 2010 में तत्कालीन नगर निगम आयुक्त द्वारा रजिस्ट्रार कार्यालय को पत्र लिखकर स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि योजना क्रमांक-15 की अधिग्रहित भूमि पर नगर निगम की अनुमति के बिना किसी भी प्रकार की रजिस्ट्री न की जाए।
इसके बावजूद, नियमों की अनदेखी करते हुए इस पूरी भूमि की रजिस्ट्री पारिवारिक कंपनियों और निजी व्यक्तियों के नाम पर कर दी गई, जो कानून का खुला उल्लंघन है।
सरहदी नाले से छेड़छाड़ का आरोप
शिकायत का सबसे गंभीर बिंदु सरहदी नाले से छेड़छाड़ का है। आरोप है कि ग्राम झिंझरी और ग्राम अमकुही के बीच स्थित प्राकृतिक नाले को वर्ष 2021 में जेसीबी मशीनों से खुदवाकर लगभग 60 मीटर दक्षिण दिशा में शिफ्ट कर दिया गया।
इस अवैध बदलाव के कारण सरकारी भूमि और औद्योगिक केंद्र विकास निगम की जमीन पर भी कब्जा हो गया। पहले नाले की दूरी राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-7 से लगभग 135-140 मीटर थी, जिसे बढ़ाकर करीब 200 मीटर कर दिया गया।
भूमि का रकबा बढ़ाकर अवैध कब्जा
शिकायत के अनुसार, नाले को शिफ्ट करने और पुराने नाले को भरवाने के बाद ग्राम झिंझरी की लगभग 6 एकड़ भूमि का रकबा गैर-कानूनी रूप से बढ़ गया। इससे पारिवारिक कंपनियों के नाम खरीदी गई भूमि का क्षेत्रफल 5.635 एकड़ से बढ़कर लगभग 11 एकड़ हो गया।
इतना ही नहीं, कुल मिलाकर लगभग 41 एकड़ खरीदी गई भूमि के स्थान पर करीब 55 एकड़ भूमि पर अवैध कब्जा कर लिया गया और चारों ओर 20-20 फुट ऊंची बाउंड्री वॉल खड़ी कर दी गई।
महापौर ने दिया जांच का आश्वासन
महापौर जनसुनवाई में शिकायत सुनने के बाद महापौर प्रीति सूरी ने पूरे मामले की न्यायोचित जांच कराने और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि जनहित से जुड़े इस मामले में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
जनआंदोलन और न्यायालय जाने की चेतावनी
शिकायतकर्ता कमल पांडे ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही ठोस और प्रभावी कार्रवाई नहीं होती, तो वे
माननीय न्यायालय की शरण लेंगे
साथ ही जनआंदोलन शुरू करेंगे
उनका कहना है कि यह मामला केवल जमीन का नहीं, बल्कि कटनी की आम जनता के अधिकारों और भविष्य से जुड़ा हुआ है।
अब प्रशासन की परीक्षा
अब सवाल यह है कि वर्षों से लंबित इस गंभीर जमीन घोटाले पर प्रशासन कब जागेगा। क्या नगर निगम और राजस्व विभाग निष्पक्ष जांच करेंगे या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। जनता की नजरें अब प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
आवासीय योजना क्रमांक-15 का यह मामला न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही, बल्कि सत्ता और सिस्टम की मिलीभगत की तस्वीर भी पेश करता है। यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो यह मामला कटनी का सबसे बड़ा जमीन घोटाला बन सकता है।
Written & Edited By : ADIL AZIZ
(जनहित की बात, पत्रकारिता के साथ)
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फ़रवरी 04, 2026
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