कटनी में आदिवासी भूमि घोटाले पर बढ़ा विवाद — आयोग ने लिया संज्ञान, कलेक्टर ने जारी किया नोटिस, शिकायतकर्ता ने की बैंक खातों की जांच की मांग
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📍स्थान: कटनी (मध्यप्रदेश)
दिनांक: 30 अक्टूबर 2025
Written & Edited By : आदिल अज़ीज़
(जनहित की बात, पत्रकारिता के साथ)
PUBLIC SAB JANTI HAI | Email : publicnewsviews1@gmail.com
🌾 आदिवासी भूमि विवाद पर आयोग की सख्ती — अब कलेक्टर के आदेश पर होगी जांच
कटनी जिले में आदिवासी भूमि से जुड़ा एक बड़ा मामला अब प्रशासनिक जांच के घेरे में आ गया है। पत्रिका न्यूज़ नेटवर्क के कटनी संस्करण में प्रकाशित खबर “धोखा – आदिवासियों को मोहरा बना बैगा की एकड़ जमीन छीनी” ने पूरे जिले में हलचल मचा दी है। इस खबर के आधार पर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) ने मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन को विस्तृत जांच के निर्देश जारी किए हैं।
🏛️ कटनी कलेक्टर कार्यालय की कार्रवाई – जारी हुआ नोटिस
कटनी कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी कार्यालय ने नोटिस क्रमांक-02 (13155/2025) जारी करते हुए नाचू कोल, पिता राममिलन कोल, निवासी ग्राम गोझ्न्द्रा, तहसील विजयराघवगढ़, जिला कटनी को 29 अक्टूबर 2025 को प्रातः 11:00 बजे उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं।
इससे पहले 16 अक्टूबर को भी नोटिस जारी किया गया था, लेकिन संबंधित व्यक्ति उपस्थित नहीं हुआ।
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📜 आयोग के तीन पत्रों पर आधारित जांच
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग, नई दिल्ली द्वारा तीन महत्वपूर्ण पत्र —
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NCST/DEV-5654/MP/21/2025-RU (28 अगस्त 2025)
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NCST/DEV-5455/MP/21/2025-RU (28 अगस्त 2025)
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NCST/DEV-5335/MP/93/2025-RU (15 सितंबर 2025)
के माध्यम से जिला प्रशासन को निर्देशित किया गया कि समाचार में प्रकाशित आरोपों और शिकायत की जांच की जाए।
⚖️ संविधान के अनुच्छेद 338(क) के तहत कार्रवाई
आयोग ने यह मामला संविधान के अनुच्छेद 338(क) के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए जांच हेतु दर्ज किया है। इस प्रावधान के अंतर्गत आयोग को अनुसूचित जनजातियों के अधिकारों की रक्षा हेतु प्रत्यक्ष जांच करने का अधिकार प्राप्त है।
👨💼 डिप्टी कलेक्टर और तहसीलदार को मिले निर्देश
कलेक्टर कार्यालय ने इस पूरे प्रकरण की जिम्मेदारी डिप्टी कलेक्टर कटनी को सौंपी है।
साथ ही तहसील विजयराघवगढ़ के तहसीलदार को आदेश दिया गया है कि वे संबंधित व्यक्ति को नोटिस तामील कराते हुए उसकी रिपोर्ट कार्यालय में प्रस्तुत करें।
📢 शिकायतकर्ता दिव्यांशु अंशु मिश्रा के गंभीर आरोप
इस मामले में शिकायतकर्ता दिव्यांशु अंशु मिश्रा ने प्रशासन की कार्यवाही पर सवाल उठाते हुए कहा है —
“आदिवासी भूमि घोटाले पर दूसरे नोटिस के बाद भी संजय पाठक के चारों आदिवासी कर्मचारी हाज़िर नहीं हुए।
दिनांक 25/10/2025 को जारी हुए नोटिस में 29/10/2025 को उपस्थित होना था।
जिला प्रशासन को चाहिए कि वह चारों आदिवासी कर्मचारियों को तत्काल खोजे और उनके बैंक खातों की जांच कराए, जिससे पूरी स्थिति स्पष्ट हो सके। साथ ही चारों आदिवासियों एवं उनके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।”
दिव्यांशु मिश्रा (अंशु) ने यह भी कहा कि अगर प्रशासन समय रहते पारदर्शी जांच नहीं करता, तो यह मामला और गंभीर रूप ले सकता है।
🗣️ स्थानीय स्तर पर बढ़ी चर्चाएँ
इस पूरे प्रकरण ने जिले में व्यापक चर्चा छेड़ दी है। ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि अगर यह सच है कि आदिवासी समुदाय की जमीन छलपूर्वक छीनी गई है, तो यह संविधानिक अधिकारों का खुला उल्लंघन है।
वहीं प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
🧭 संजय पाठक के आदिवासी कर्मचारियों पर उठे सवाल
शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों में विशेष रूप से संजय पाठक से जुड़े चार आदिवासी कर्मचारियों के नाम सामने आने की चर्चा है।
हालांकि प्रशासन की ओर से अभी किसी का नाम आधिकारिक रूप से दर्ज नहीं किया गया है, परन्तु यह सवाल उठ रहे हैं कि अगर नोटिस जारी होने के बाद भी संबंधित लोग उपस्थित नहीं हो रहे, तो यह प्रशासनिक गंभीरता का विषय है।
🔎 बैंक खातों की जांच की मांग
दिव्यांशु अंशु मिश्रा की मांग के अनुसार, इन चारों आदिवासी कर्मचारियों के बैंक खातों की जांच की जानी चाहिए, ताकि किसी वित्तीय लेनदेन या संदिग्ध गतिविधि का पता लगाया जा सके।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि प्रशासन को इन कर्मचारियों की और उनके परिवार की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी उठानी चाहिए, क्योंकि मामले में बाहरी दबाव की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
🌍 जनता की उम्मीदें और प्रशासन की जिम्मेदारी
कटनी के नागरिकों की निगाहें अब प्रशासन पर टिकी हैं। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि इस मामले में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होगी।
कलेक्टर कार्यालय का नोटिस जारी करना एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है, जो यह दर्शाता है कि जिला प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले रहा है।
🧾 समापन विचार
यह पूरा मामला केवल एक भूमि विवाद नहीं, बल्कि यह आदिवासी अधिकारों की रक्षा और प्रशासनिक पारदर्शिता की परीक्षा है।
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग का हस्तक्षेप यह दर्शाता है कि संविधानिक संस्थाएँ अब भी हाशिए पर खड़े वर्गों की आवाज़ बनने का कार्य कर रही हैं।
29 अक्टूबर 2025 की सुनवाई इस विवाद का अहम मोड़ साबित हो सकती है — जहाँ यह तय होगा कि आदिवासी भूमि घोटाले की सच्चाई क्या है और कौन इसके लिए जिम्मेदार है।
Written & Edited By : आदिल अज़ीज़
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