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कटनी में अमानक बीज विक्रय पर कड़ी कार्रवाई: सात विक्रेताओं का प्राधिकार निलंबित

 



कटनी (मध्यप्रदेश)।
जिले में किसानों को गुणवत्ता पूर्ण खाद-बीज उपलब्ध कराने और उन्हें ठगी से बचाने के उद्देश्य से प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। कलेक्टर दिलीप कुमार यादव के सख्त निर्देशों के पालन में सात बीज विक्रेताओं का बीज विक्रय प्राधिकार निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई उन दुकानों पर हुई, जिनसे लिए गए धान के बीजों के नमूने प्रयोगशाला जांच में अमानक पाए गए।

कलेक्टर यादव ने साफ कहा है कि किसानों को धोखा देने वाले खाद-बीज विक्रेताओं को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा।


किसानों की सुरक्षा को लेकर सख्त प्रशासन

प्रशासन की इस कार्रवाई ने जिलेभर के किसानों को राहत का संदेश दिया है। किसान लंबे समय से शिकायत कर रहे थे कि कई दुकानों पर अमानक खाद और बीज बेचे जा रहे हैं, जिससे फसल उत्पादन प्रभावित हो रहा है।

कलेक्टर यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही यह भी कहा कि यदि कोई विक्रेता या व्यापारी किसानों को निम्न स्तर का बीज या खाद बेचता है, तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


जिन विक्रेताओं पर गिरी गाज

जिले के विभिन्न विकासखंडों के सात बीज विक्रेताओं का विक्रय प्राधिकार तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।

कटनी विकासखंड के विक्रेता:

  1. मेसर्स सुहाने बीज भंडार (प्रो. श्याम सुहाने)

  2. मेसर्स मौर्या सीड्स कंपनी (प्रो. विजय बहादुर मौर्या)

  3. मेसर्स पटेल बीज भंडार (प्रो. कालीचरण पटेल)

  4. मेसर्स चौहान बीज भंडार (प्रो. श्रवण कुमार चौहान)

बड़वारा विकासखंड के विक्रेता:

  1. मेसर्स आरपी कृषि केंद्र (प्रो. पूनम पटेल)

  2. मेसर्स न्यू गुरूकृपा बीज भंडार (प्रो. सतेंद्र कुमार सिंह)

विजयराघवगढ़ विकासखंड का विक्रेता:

  1. मेसर्स जनक नंदनी कृषि सेवा केंद्र (प्रो. सुधांशु दुबे)

इन सभी विक्रेताओं की लाइसेंस वैधता तिथियां अलग-अलग थीं, लेकिन जांच रिपोर्ट में धान के बीज अमानक पाए जाने पर तत्काल प्रभाव से उनकी अनुमति निलंबित कर दी गई।


किसानों को राहत की उम्मीद

बीज विक्रेताओं की मनमानी और अमानक बिक्री के कारण किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था। कई बार किसान महंगे दामों पर बीज खरीदते हैं लेकिन जब वह खेतों में उगते ही खराब हो जाते हैं, तो उनका सपना और मेहनत दोनों टूट जाते हैं।

अब इस कार्रवाई से किसानों को उम्मीद जगी है कि भविष्य में खाद और बीज की गुणवत्ता पर अधिक सख्ती होगी और उन्हें सही मूल्य पर सही उत्पाद मिलेगा।


एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश

कलेक्टर यादव ने सिर्फ प्राधिकार निलंबित करने तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि खाद की कालाबाजारी, अवैध भंडारण, टैगिंग, मिस ब्रांडिंग और अवैध परिवहन जैसे मामलों में भी दोषियों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम सहित अन्य धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की जाए।

एसडीएम और कृषि विभाग के अधिकारियों को इसकी निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।


किसानों का दर्द: "मेहनत पर पानी फिरता है"

कटनी के कई किसानों ने बातचीत में बताया कि बीते साल उन्हें अमानक बीज मिलने के कारण फसल उत्पादन आधा रह गया। किसानों ने कहा कि जब धान के पौधे सही तरह से नहीं पनपे, तो पूरी मेहनत और लागत पर पानी फिर गया।

किसानों का कहना है कि प्रशासन का यह कदम सराहनीय है। यदि समय-समय पर ऐसी कार्रवाई होती रहे, तो बाजार में अमानक बीज बेचने वाले खुद-ब-खुद सुधर जाएंगे।


कृषि विभाग की भूमिका

उपसंचालक किसान कल्याण एवं कृषि विकास डॉ. आर एन पटेल ने जानकारी दी कि यह कार्रवाई बीज गुण नियंत्रण आदेश 1983 की धारा 15 के अंतर्गत की गई है। उन्होंने कहा कि जांच अभियान जारी रहेगा और किसी भी कीमत पर किसानों को नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।


प्रशासन का संदेश – "किसानों के साथ धोखा बर्दाश्त नहीं"

कलेक्टर यादव ने दो टूक कहा है कि किसानों को ठगने वालों पर किसी भी स्तर पर नरमी नहीं बरती जाएगी। खाद-बीज विक्रेता अगर नियमों का पालन नहीं करेंगे तो उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी।

उनका संदेश साफ है – "अन्नदाता के साथ किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी करने वालों को सजा मिलेगी।"



कटनी जिला प्रशासन की इस कार्रवाई ने एक मजबूत संदेश दिया है कि किसानों के साथ किसी भी तरह की ठगी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सात विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित होना बाकी विक्रेताओं के लिए भी चेतावनी है कि अगर उन्होंने नियमों का उल्लंघन किया तो कार्रवाई निश्चित है।

किसानों की मेहनत और भविष्य की सुरक्षा के लिए ऐसी कठोर कार्रवाई जरूरी है। प्रशासन का यह कदम न सिर्फ किसानों के लिए राहत है बल्कि कृषि व्यवस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता के लिए भी अहम है।


✍️ Written & Edited By : ADIL AZIZ
(जनहित की बात, पत्रकारिता के साथ)
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