अब ससुराल आकर नियमित शिक्षा ग्रहण करेंगी लक्ष्मी – शिक्षकों की पहल से जागी नई उम्मीद
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कटनी/रीठी । जब किसी में शिक्षा ग्रहण करने की ललक होती है तो उसके लिए सारे दरवाजे खुल जाते हैं। इंसान अपनी जिज्ञासा और परिश्रम से न केवल अपने जीवन को नई दिशा देता है बल्कि समाज के लिए भी प्रेरणा का कारण बनता है। कुछ ऐसा ही प्रेरणादायक मामला सामने आया है शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नैगवा से, जो जंगलों के बीच बसा हुआ है और जहां की अधिकांश आबादी आदिवासी समाज की है।
यहां पर एक नवविवाहिता बहू लक्ष्मी ने अपनी शिक्षा जारी रखने का संकल्प लिया है। यह निर्णय सिर्फ उनके जीवन को नहीं बदलेगा बल्कि गांव की अन्य बालिकाओं और महिलाओं को भी शिक्षा की ओर अग्रसर करेगा।
शिक्षकों की पहल बनी मिसाल
विद्यालय में पदस्थ शिक्षकों ने समय-समय पर अनुपस्थित छात्रों के घर जाकर उन्हें पढ़ाई के लिए प्रेरित करने का अभियान चलाया हुआ है। इसी पहल के दौरान जब छात्रा अतुल कुमारी विद्यालय से अनुपस्थित पाई गई तो शिक्षक उसके घर पहुंचे। वहीं बातचीत के दौरान घर की नवविवाहित बहू लक्ष्मी भी मिलीं।
जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने कहां तक पढ़ाई की है तो उन्होंने बताया कि वे नियमित रूप से दसवीं कक्षा उत्तीर्ण कर चुकी हैं, लेकिन विवाह के कारण आगे पढ़ाई नहीं कर पाईं। बातचीत के दौरान उन्होंने अपनी गहरी इच्छा व्यक्त की कि यदि उन्हें मौका मिले तो वे शिक्षा जारी रखना चाहेंगी।
परिवार का सहयोग बना संबल
लक्ष्मी की यह इच्छा सुनकर उनके ससुर गजराज, सास सरोज और पति देवराज ने भी आगे आकर साथ दिया। यह परिवार शिक्षा के महत्व को समझता है और उन्होंने तुरंत निर्णय लिया कि लक्ष्मी को फिर से विद्यालय भेजा जाएगा।
परिवार ने लक्ष्मी को विद्यालय पहुंचाया और वहां पर उनका 11वीं कक्षा में प्रवेश कराया गया। विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य विपिन तिवारी ने जानकारी दी कि लक्ष्मी पूर्व में पन्ना जिले के शासकीय हाई स्कूल दमुईया से दसवीं उत्तीर्ण कर चुकी हैं। अब वे अपनी आगे की शिक्षा यहां से नियमित रूप से करेंगी।
तिमाही परीक्षा से ही जुड़ी पढ़ाई में
लक्ष्मी ने प्रवेश लेने के अगले ही दिन तिमाही परीक्षा में भाग लिया और यह साबित किया कि वे शिक्षा के प्रति कितनी गंभीर हैं। विद्यालय स्टाफ ने उनका स्वागत फूल बरसाकर और मिठाई खिलाकर किया। यह क्षण न केवल लक्ष्मी के लिए बल्कि पूरे गांव और जिले के लिए गर्व का पल बन गया।
लक्ष्मी का कहना है कि –
“मैं चाहती हूं कि शासन द्वारा जो विद्यालय खोला गया है, उसका पूरा लाभ उठाऊं और कम से कम 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई नियमित रूप से पूरी करूं। घर के कामकाज निपटाकर समय से विद्यालय पहुंचना मेरी पहली प्राथमिकता होगी।”
समाज को दिया प्रेरक संदेश
लक्ष्मी ने स्पष्ट कहा कि उनके समाज में अधिकांश बालिकाएं शादी के बाद शिक्षा छोड़ देती हैं, लेकिन वे चाहती हैं कि यह परंपरा बदले। उन्होंने अन्य लड़कियों और महिलाओं से भी आग्रह किया कि वे पढ़ाई-लिखाई जारी रखें क्योंकि शिक्षा ही जीवन में वास्तविक बदलाव लाती है।
आज सरकार कई योजनाएं चला रही है जिनका लाभ लेकर महिलाएं और छात्राएं आत्मनिर्भर बन सकती हैं।
शिक्षकों की नवाचारपूर्ण पहल
नैगवा विद्यालय के शिक्षक लगातार नवाचार करते रहते हैं। हाल ही में यहां शिक्षकों ने अपने स्तर पर ड्रेस कोड लागू कर एक अनुकरणीय उदाहरण पेश किया है। अब लक्ष्मी का विद्यालय में प्रवेश इस अभियान को और मजबूत करेगा।
लोग शिक्षकों की इस पहल की सराहना कर रहे हैं और इसे पूरे मध्यप्रदेश के लिए प्रेरक उदाहरण मान रहे हैं।
कटनी से उठी नई अलख
यह मामला सिर्फ नैगवा गांव तक सीमित नहीं है। यह पूरे कटनी जिले और मध्यप्रदेश के लिए एक अनोखी मिसाल है। विवाहित महिला का किसी विद्यालय में नियमित प्रवेश लेना अपने आप में दुर्लभ और ऐतिहासिक कदम है।
यह घटना इस बात का प्रमाण है कि यदि समाज, परिवार और शिक्षक मिलकर किसी को सहयोग करें तो शिक्षा का प्रकाश सबसे कठिन हालात में भी पहुंच सकता है।
लड़कियों की शिक्षा – बदलती तस्वीर
ग्रामीण और आदिवासी अंचलों में अक्सर देखा जाता है कि लड़कियां विवाह या घरेलू जिम्मेदारियों के कारण पढ़ाई छोड़ देती हैं। लेकिन लक्ष्मी की कहानी यह बताती है कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, शिक्षा की इच्छा और पारिवारिक सहयोग से बदलाव संभव है।
यह पहल न केवल लक्ष्मी को शिक्षित करेगी बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करेगी।
शिक्षा है असली शक्ति
लक्ष्मी का विद्यालय में प्रवेश इस बात का प्रतीक है कि शिक्षा पाने की चाह और परिवार का सहयोग मिलकर जीवन को नई दिशा दे सकता है।
यह घटना उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है जो मानते हैं कि शादी या घरेलू परिस्थितियां लड़कियों की पढ़ाई में रुकावट बन जाती हैं। अगर इच्छाशक्ति मजबूत हो और परिवार-सamaj का सहयोग मिले तो हर बाधा पार की जा सकती है।
✍️ Written & Edited By : ADIL AZIZ
(जनहित की बात, पत्रकारिता के साथ)
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