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महाराणा प्रताप वार्ड में अवैध कॉलोनी निर्माण पर निगम की बड़ी कार्रवाई, कॉलोनाइजर के खिलाफ FIR दर्ज

 





कटनी | 13 अगस्त 2026 | समय: 11:58 PM

कटनी के महाराणा प्रताप वार्ड में बिना अनुमति प्लॉटिंग और अवैध कॉलोनी निर्माण के मामले में निगम की शिकायत पर कॉलोनाइजर के खिलाफ FIR दर्ज।

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 महाराणा प्रताप वार्ड कटनी में अवैध कॉलोनी निर्माण के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई

Written & Edited By : ADIL AZIZ
(जनहित की बात, पत्रकारिता के साथ) 

PUBLIC SAB JANTI HAI
Email: publicnewsviews1@gmail.com

कटनी में अवैध कॉलोनी निर्माण पर निगम प्रशासन सख्त

कटनी शहर में बिना अनुमति कॉलोनी विकसित करने और अवैध रूप से प्लॉट बेचने वालों के खिलाफ नगर निगम प्रशासन ने अपना रुख और सख्त कर दिया है। महाराणा प्रताप वार्ड क्रमांक 43 में बिना सक्षम अनुमति कृषि भूमि पर कथित तौर पर प्लॉटिंग कर भूखंडों की बिक्री करने के मामले में नगर निगम की शिकायत पर माधव नगर थाना पुलिस ने कॉलोनाइजर शुभम साहू, पिता लखन साहू, निवासी कुठला के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार प्राथमिकी 12 अगस्त को दर्ज की गई और इसका क्रमांक 0801 बताया गया है। निगम प्रशासन के अनुसार पिछले दो दिनों में अवैध कॉलोनी निर्माण के खिलाफ यह तीसरी बड़ी कार्रवाई है।

यह कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है जब नगर निगम प्रशासन शहर में अनधिकृत कॉलोनियों और बिना अनुमति प्लॉटिंग पर लगातार निगरानी बढ़ाने की बात कह रहा है।

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महाराणा प्रताप वार्ड में बिना अनुमति प्लॉटिंग का आरोप

नगर निगम की शिकायत के अनुसार मामला महाराणा प्रताप वार्ड क्रमांक 43 में हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी और वैदिक हाईट के सामने स्थित भूमि से जुड़ा है। शिकायत में प.ह.न. 38, मौजा ग्राम अमकुही, राजस्व निरीक्षण मंडल मुड़वारा की भूमि के खसरा नंबर 284/5 का उल्लेख किया गया है।

निगम प्रशासन का आरोप है कि संबंधित भूमि पर सक्षम अधिकारी अथवा संबंधित विभाग की अनुमति के बिना प्लॉटिंग की गई। शिकायत के मुताबिक इस भूमि के करीब सात अलग-अलग भूखंड विभिन्न व्यक्तियों को बेच दिए गए।

निगम की शिकायत में इन गतिविधियों से करोड़ों रुपये का कथित अवैध लाभ अर्जित किए जाने की बात भी कही गई है। हालांकि इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।

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कृषि भूमि का गैर-कृषि उपयोग करने का आरोप

शिकायत में एक महत्वपूर्ण बिंदु यह भी है कि राजस्व अभिलेखों में संबंधित जमीन कृषि भूमि के रूप में दर्ज है। इसके बावजूद आरोप है कि भूमि का उपयोग गैर-कृषि उद्देश्य के लिए किया गया और वहां सड़क सहित अन्य विकास कार्य कराए गए।

नगर निगम के अनुसार संबंधित भूमि पर कॉलोनी विकसित करने से पहले आवश्यक अनुमतियां और स्वीकृतियां प्राप्त नहीं की गईं। आरोप यह भी है कि नगर निगम तथा नगर एवं ग्राम निवेश विभाग से आवश्यक ले-आउट स्वीकृत नहीं कराया गया और निर्माण संबंधी अनुमति भी प्राप्त नहीं की गई।

मध्य प्रदेश में भूमि विकास और कॉलोनी निर्माण से जुड़े नियमों के लिए नगर तथा ग्राम निवेश संचालनालय द्वारा संबंधित अधिनियम और नियम उपलब्ध कराए गए हैं। विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश नियम, 2012 तथा भूमि विकास नियमों की जानकारी उपलब्ध है। (M Town Plan)

कॉलोनाइजर लाइसेंस और विकास अनुमति पर भी सवाल

नगर निगम की शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि संबंधित व्यक्ति ने नियमानुसार कॉलोनाइजर लाइसेंस प्राप्त किए बिना तथा कॉलोनी का संपूर्ण विकास किए बिना भूखंडों का विक्रय किया।

मध्य प्रदेश में कॉलोनाइजर से संबंधित नियमों और कानूनों में कॉलोनी विकास, कॉलोनाइजर के पंजीयन तथा भूमि उपयोग से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। नगर तथा ग्राम निवेश संचालनालय की आधिकारिक जानकारी में नगर पालिका (कॉलोनी विकास) नियम, 2021, कॉलोनाइजर से संबंधित पुराने नियम तथा मध्य प्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956 के संबंधित प्रावधान सूचीबद्ध हैं। (M Town Plan)

निगम प्रशासन का कहना है कि आवश्यक अनुमति के बिना कॉलोनी विकसित करने और भूखंडों की बिक्री से शासन तथा नगर निगम को राजस्व की क्षति भी हो सकती है।

माधव नगर थाना पुलिस ने दर्ज की FIR

नगर निगम की शिकायत के आधार पर माधव नगर थाना पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार जांच की जिम्मेदारी कार्यवाहक प्रधान आरक्षक कमलेश बैरागी को सौंपी गई है।

शिकायत में नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956 की धारा 292(ग) के तहत कार्रवाई का अनुरोध किया गया था। मध्य प्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम में अवैध कॉलोनी और अवैध भूमि उपयोग से संबंधित प्रावधान मौजूद हैं। आधिकारिक अधिनियम में अवैध कॉलोनी से जुड़े दंड तथा संबंधित व्यक्तियों की जिम्मेदारी से जुड़े प्रावधान भी दर्ज हैं। (MP Urban Development Authority)

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि प्राथमिकी दर्ज होना आरोपों की जांच की शुरुआत है। मामले में आरोपों की पुष्टि या अंतिम दोष सिद्धि सक्षम न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही होगी।

दो दिनों में तीसरी बड़ी कार्रवाई

नगर निगम प्रशासन के अनुसार अवैध कॉलोनियों के खिलाफ पिछले दो दिनों में यह तीसरी बड़ी कार्रवाई है। निगम प्रशासन का कहना है कि शहर में नियमों को दरकिनार कर कॉलोनी विकसित करने, अनधिकृत प्लॉटिंग करने अथवा बिना वैध अनुमति भूखंड बेचने वालों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा।

निगमायुक्त तपस्या परिहार के निर्देशन में चल रही कार्रवाई के संबंध में निगम प्रशासन ने बताया है कि अब तक करीब एक दर्जन कॉलोनाइजरों के खिलाफ अवैध कॉलोनी निर्माण को लेकर प्राथमिकी दर्ज कराई जा चुकी है।

प्रशासन की इस सख्ती का सीधा संबंध उन लोगों से भी है जो कम कीमत या सुविधाजनक स्थान के नाम पर प्लॉट खरीदने का निर्णय लेते हैं। ऐसे मामलों में खरीदार के लिए केवल जमीन का दस्तावेज देखना पर्याप्त नहीं माना जा सकता, बल्कि भू-उपयोग, ले-आउट स्वीकृति और विकास अनुमति जैसी जानकारियों की भी जांच जरूरी है।

प्लॉट खरीदने से पहले नागरिक इन बातों की करें जांच

अवैध कॉलोनी और अनधिकृत प्लॉटिंग से जुड़े मामलों के सामने आने के बाद आम नागरिकों के लिए भी सावधानी महत्वपूर्ण हो जाती है। किसी भी भूखंड को खरीदने से पहले संबंधित भूमि के राजस्व रिकॉर्ड, भूमि उपयोग, स्वीकृत ले-आउट, विकास अनुमति और कॉलोनाइजर के वैध पंजीयन की जानकारी संबंधित विभाग से सत्यापित करना उपयोगी है।

नगर एवं ग्राम निवेश संचालनालय की वेबसाइट पर भूमि उपयोग प्रमाण पत्र, विकास अनुज्ञा तथा अन्य आवेदन प्रक्रियाओं से संबंधित जानकारी उपलब्ध है। (M Town Plan)

नागरिक विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध नियमों और स्वीकृतियों की जानकारी का उपयोग कर सकते हैं। नगर तथा ग्राम निवेश संचालनालय, मध्य प्रदेश की आधिकारिक वेबसाइट

प्रशासन की कार्रवाई से अवैध कॉलोनाइजरों में बढ़ी चिंता

कटनी में लगातार हो रही कार्रवाई से यह संकेत स्पष्ट है कि नगर निगम प्रशासन अब अनधिकृत कॉलोनी निर्माण और प्लॉटिंग को लेकर सख्ती बरत रहा है। प्रशासन का संदेश है कि नगरीय क्षेत्र में नियमों का उल्लंघन कर जमीन का विकास या भूखंडों की बिक्री करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

महाराणा प्रताप वार्ड का मामला अब पुलिस जांच के चरण में है। जांच में जमीन से जुड़े दस्तावेज, बिक्री किए गए भूखंडों, निर्माण कार्यों और आवश्यक अनुमतियों की स्थिति जैसे पहलुओं की पड़ताल की जा सकती है।

आने वाले दिनों में इस मामले की जांच से यह स्पष्ट होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों के संबंध में कौन-कौन से तथ्य सामने आते हैं और संबंधित पक्ष की कानूनी स्थिति क्या बनती है।

कटनी में अवैध कॉलोनी निर्माण और अनधिकृत प्लॉटिंग के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई ने शहर में जमीन खरीदने और कॉलोनी विकसित करने से जुड़े नियमों पर फिर से ध्यान खींचा है। महाराणा प्रताप वार्ड में दर्ज FIR इसी अभियान की कड़ी बताई जा रही है।

प्रशासन की कार्रवाई के बीच नागरिकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि किसी भी प्लॉट की खरीद से पहले उसके दस्तावेजों के साथ-साथ ले-आउट स्वीकृति, भूमि उपयोग, विकास अनुमति और कॉलोनाइजर की वैधता की जांच अवश्य करें। इससे भविष्य में कानूनी विवाद और आर्थिक नुकसान की आशंका को कम किया जा सकता है।

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