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कटनी में जल गंगा संवर्धन अभियान की शुरुआत, कटाएघाट पर दिखी जनभागीदारी की ताकत

 जल गंगा संवर्धन अभियान बना जनसहभागिता की मिसाल, कटाएघाट नदी की सफाई के लिए एक साथ उठे सैकड़ों हाथ


कटनी के कटाएघाट में जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत सैकड़ों लोगों ने श्रमदान कर नदी सफाई की। तीन ट्राली अपशिष्ट हटाकर जल संरक्षण का संदेश दिया।


कटनी में जल गंगा संवर्धन अभियान से नदी सफाई शुरू




कटनी में जल गंगा अभियान: नदी सफाई के लिए जनसैलाब

जल गंगा संवर्धन अभियान

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19 March 2026
08:45 PM IST

✍️ Written & EditedBy : ADIL AZIZ

(जनहित की बात, पत्रकारिता के साथ)
PUBLIC SAB JANTI HAI
Email: publicnewsviews1@gmail.com


कटनी में गुरुवार को जल गंगा संवर्धन अभियान की शुरुआत एक प्रेरक तस्वीर के साथ हुई, जब कटाएघाट स्थित कटनी नदी की सफाई के लिए सैकड़ों हाथ एक साथ उठे। सुबह 8 बजे शुरू हुए इस अभियान ने सिर्फ सफाई का काम नहीं किया, बल्कि यह भी दिखाया कि जब प्रशासन, जनप्रतिनिधि और आम नागरिक एक मंच पर आ जाएं, तो जल संरक्षण सचमुच जनआंदोलन बन सकता है।

राज्य शासन के निर्देश पर शुरू हुआ यह अभियान 19 मार्च 2026 से 30 जून 2026 तक चलेगा। अभियान का मकसद केवल नदी-घाटों की साफ-सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि जल स्रोतों का संरक्षण, भूजल संवर्धन, जल संरचनाओं का निर्माण, पुराने स्रोतों का जीर्णोद्धार और प्रदूषण नियंत्रण जैसे कार्यों को भी जनसहभागिता के माध्यम से आगे बढ़ाना है।

कटाएघाट नदी सफाई अभियान में मानव श्रृंखला बनाकर हटाया गया अपशिष्ट

कटाएघाट में चले सफाई अभियान का सबसे प्रभावशाली दृश्य वह रहा, जब घाट की सीढ़ियों पर लोगों ने मानव श्रृंखला बनाकर नदी से निकाले गए कचरे, सिल्ट, चोई, पूजन सामग्री और अन्य अपशिष्ट को ऊपर तक पहुंचाया। तसलों और बैगों के माध्यम से यह कचरा निगम के वाहनों तक पहुंचाया गया।

अभियान के दौरान लगभग तीन ट्राली अपशिष्ट एकत्र किया गया, जिसे बाद में उपचार के लिए प्लांट भेजा गया। यह केवल सफाई की कार्रवाई नहीं थी, बल्कि एक संगठित नागरिक प्रयास था, जिसने नदी संरक्षण की दिशा में ठोस संदेश दिया।

नदी और घाट क्षेत्र में जमी गंदगी को हटाने के लिए सामूहिक श्रमदान किया गया। इससे साफ हुआ कि अगर स्थानीय समुदाय जिम्मेदारी ले, तो जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाना संभव है।

कटाएघाट में जल गंगा संवर्धन अभियान के दौरान नदी सफाई करते लोग



30 जून तक चलेगा जल गंगा संवर्धन अभियान

प्रशासन के अनुसार, जल गंगा संवर्धन अभियान 30 जून तक चलाया जाएगा। इस अवधि में न केवल सफाई, बल्कि जल से जुड़ी कई संरचनात्मक और संरक्षण गतिविधियां भी की जाएंगी।

निगमायुक्त तपस्या परिहार ने बताया कि अभियान के अंतर्गत जल संरचनाओं का निर्माण, भूजल स्तर को सुधारने की पहल, जल स्रोतों की सफाई, जीर्णोद्धार और प्रदूषण नियंत्रण जैसे काम व्यापक स्तर पर किए जाएंगे। इसका उद्देश्य साफ है—जल संरक्षण को सरकारी कार्यक्रम भर नहीं, बल्कि जनसामान्य की जिम्मेदारी बनाना।

यह पहल ऐसे समय में शुरू हुई है, जब देश के कई हिस्सों में गर्मी के साथ जल संकट की चिंता बढ़ने लगती है। ऐसे में स्थानीय नदियों, तालाबों और जलस्रोतों की देखभाल अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।


कटनी में जल संरक्षण अभियान के दौरान घाट क्षेत्र की सफाई

अभियान के शुभारंभ में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की सक्रिय मौजूदगी

अभियान के शुभारंभ अवसर पर महापौर प्रीति संजीव सूरी, नगर निगम अध्यक्ष मनीष पाठक, वन मंडलाधिकारी गर्वित गंगवार और निगमायुक्त तपस्या परिहार सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी, सामाजिक कार्यकर्ता और आम नागरिक मौजूद रहे।

इस सामूहिक श्रमदान में नगर निगम के अधिकारियों के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण से जुड़े समूहों और एनजीओ सदस्यों ने भी भाग लिया। इससे साफ है कि अभियान केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं रहा, बल्कि इसे व्यापक सामाजिक भागीदारी मिली।

 सफाई अभियान में इन लोगों की रही मौजूदगी

इस मौके पर मेयर इन काउंसिल सदस्य डॉ. रमेश सोनी, सुभाष साहू, सुरेंद्र गुप्ता, पार्षद सीमा श्रीवास्तव, नीलम जगवानी, निशा मिश्रा, आशुतोष मानके, उपायुक्त शैलेश गुप्ता, कार्यपालन यंत्री सुधीर मिश्रा, अंशुमान सिंह, आदेश जैन, अनिल जायसवाल, सुनील सिंह, मृदुल श्रीवास्तव, मोना करेरा, शैलेन्द्र प्यासी, संजय सोनी, मानेंद्र सिंह, योगेश पवार और आलोक तिवारी सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।

कटनी के जनप्रतिनिधि और अधिकारी जल गंगा संवर्धन अभियान में शामिल















कार्यपालन यंत्री ने क्या कहा

कार्यपालन यंत्री सुधीर मिश्रा के अनुसार, कटाएघाट स्थित कटनी नदी में जमा जलकुंभी और चोई की सफाई का अभियान अब शुरू हो चुका है और नदी की पूरी सफाई होने तक यह कार्य लगातार जारी रहेगा।

यह बयान इस बात का संकेत है कि प्रशासन इस अभियान को एक दिन का आयोजन बनाकर छोड़ना नहीं चाहता, बल्कि इसे नतीजों तक पहुंचाने की मंशा रखता है। नदी में जलकुंभी और अवांछित जैविक जमाव जल प्रवाह, ऑक्सीजन संतुलन और स्वच्छता पर प्रतिकूल असर डालते हैं। ऐसे में इनकी नियमित सफाई जरूरी है।


क्यों महत्वपूर्ण है जल गंगा संवर्धन अभियान

जल संरक्षण पर चर्चा अक्सर नीतियों तक सीमित रह जाती है, लेकिन कटनी में शुरू हुआ यह अभियान ज़मीनी स्तर पर उसका क्रियान्वयन दिखाता है। नदी, तालाब और घाट सिर्फ धार्मिक या सांस्कृतिक धरोहर नहीं, बल्कि स्थानीय पारिस्थितिकी और जल सुरक्षा की रीढ़ भी हैं।

जल गंगा संवर्धन अभियान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह तीन स्तरों पर असर डाल सकता है—

  1. स्थानीय जल स्रोतों की सफाई और संरक्षण

  2. लोगों में जल बचाने की व्यवहारिक समझ

  3. प्रशासन और समाज के बीच सहयोग की नई मिसाल

जब लोग स्वयं श्रमदान करते हैं, तो उनमें स्वामित्व की भावना भी विकसित होती है। यही किसी भी जनअभियान की असली सफलता होती है।


आधिकारिक जानकारी कहां देखें

मध्यप्रदेश में जल संरक्षण और जनभागीदारी से जुड़े अभियानों की जानकारी सरकारी स्रोतों पर उपलब्ध है। जल गंगा संवर्धन अभियान से संबंधित पहल और गतिविधियों का उल्लेख मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद की आधिकारिक वेबसाइट पर देखा जा सकता है।

जल संरक्षण, नदी पुनर्जीवन और संबंधित नीतिगत दिशा-निर्देशों के लिए भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट भी उपयोगी स्रोत है।


ऊपर दिए गए Internal Links में अपने वेबसाइट के वास्तविक URL जोड़ें।


  • मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद (आधिकारिक): जनभागीदारी और जल गंगा संवर्धन अभियान संबंधी जानकारी के लिए।

  • जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार: जल संरक्षण, नदी विकास और प्रशासनिक दिशा-निर्देशों के लिए।


कटनी के कटाएघाट पर शुरू हुआ जल गंगा संवर्धन अभियान सिर्फ एक सफाई कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता, प्रशासनिक सक्रियता और नागरिक जिम्मेदारी का मजबूत उदाहरण बनकर उभरा है। तीन ट्राली अपशिष्ट हटाने से भी बड़ी बात यह रही कि लोगों ने खुद नदी को बचाने का बीड़ा उठाया।

अगर इसी तरह जनसहभागिता बनी रही, तो यह अभियान कटनी ही नहीं, पूरे प्रदेश के लिए एक मॉडल बन सकता है। जल संरक्षण की लड़ाई सरकार अकेले नहीं जीत सकती—इसके लिए समाज का साथ जरूरी है, और कटनी ने इसकी शुरुआत कर दी है।

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