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मौत के साए में पढ़ते मासूम: कैमोर वार्ड-6 की जर्जर आंगनवाड़ी पर प्रशासन मौन


कैमोर वार्ड-6 की जर्जर आंगनवाड़ी में मासूम बच्चे और गर्भवती महिलाएं खतरे में। टूटती छत, गंदगी और प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल।



कैमोर की जर्जर आंगनवाड़ी में बच्चों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल

कैमोर वार्ड 6 आंगनवाड़ी

  • जर्जर आंगनवाड़ी भवन

  • बच्चों की सुरक्षा खतरे में

  • आंगनवाड़ी व्यवस्था मध्यप्रदेश

  • गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण केंद्र



कैमोर (कटनी)

“नन्हा-मुन्ना राही हूं, देश का सिपाही हूं…”
देश के भविष्य को गढ़ने वाले ये शब्द जब जर्जर दीवारों, टपकती छत और गंदगी के बीच गूंजते हैं, तो यह केवल एक गीत नहीं, बल्कि व्यवस्था पर करारा व्यंग्य बन जाते हैं। कैमोर के खलवारा बाजार स्थित वार्ड क्रमांक-6 की आंगनवाड़ी आज इन्हीं हालातों की जीती-जागती मिसाल है, जहां मासूम बच्चों की पढ़ाई मौत के साए में कराई जा रही है।

  • कैमोर वार्ड 6 की जर्जर आंगनवाड़ी भवन




 जर्जर भवन में संचालित हो रही आंगनवाड़ी

स्थानीय नागरिकों के अनुसार, यह आंगनवाड़ी केंद्र पुराने उप-मुख्य स्वास्थ्य केंद्र के भवन में संचालित हो रहा है। भवन की हालत इतनी खराब है कि दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें साफ दिखाई देती हैं। बरसात के मौसम में छत से पानी टपकता है, जिससे फर्श पर कीचड़ और फिसलन बनी रहती है।

अभिभावकों का कहना है कि वे अपने बच्चों को यहां भेजते समय हर दिन डर के साथ विदा करते हैं कि कहीं कोई दुर्घटना न हो जाए।

  •                                                टूटती छत और दरारों वाली आंगनवाड़ी कैमोर

 बच्चों की सुरक्षा और स्वच्छता दोनों पर खतरा

आंगनवाड़ी केंद्र के आसपास गंदगी का अंबार लगा रहता है। कई बार नगर परिषद के सफाई कर्मचारी यहीं कचरा इकट्ठा कर देते हैं। इसके अलावा आवारा पशुओं का जमावड़ा भी आम बात है, जिससे संक्रमण और बीमारियों का खतरा लगातार बना रहता है।

यह स्थिति आंगनवाड़ी योजना के मूल उद्देश्य—स्वास्थ्य, पोषण और प्रारंभिक शिक्षा—पर ही सवाल खड़े करती है।

 प्रेरक गीत और डरावनी हकीकत

जहां एक ओर बच्चों को देश का भविष्य बताया जाता है, वहीं दूसरी ओर उन्हें असुरक्षित माहौल में बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। यह विरोधाभास केवल कैमोर तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों की कई आंगनवाड़ियों की सच्चाई को उजागर करता है।

 गर्भवती महिलाओं के लिए भी जोखिम

सबसे गंभीर बात यह है कि इसी आंगनवाड़ी केंद्र में हर मंगलवार को गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण किया जाता है। महिलाएं अपनी और अपने गर्भस्थ शिशु की सुरक्षा को खतरे में डालकर इस जर्जर भवन में आने को मजबूर हैं।

यदि भवन का कोई हिस्सा गिर जाए या कोई बड़ा हादसा हो जाए, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा—यह सवाल अब आम जनता खुलकर पूछ रही है।

 निरीक्षण की कमी, बढ़ती अनियमितताएं

स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण नहीं किया जाता। इसी कारण अव्यवस्थाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। कई बार समाजसेवी संगठनों ने सुधार के प्रयास किए, लेकिन बिना प्रशासनिक इच्छाशक्ति के ये प्रयास स्थायी समाधान नहीं बन सके।

 मुख्य बाजार में स्थित, फिर भी बदहाली

हैरानी की बात यह है कि यह आंगनवाड़ी कैमोर के मुख्य बाजार क्षेत्र में स्थित है। इसके बावजूद इसकी दुर्दशा यह साबित करती है कि समस्या संसाधनों की नहीं, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता की है।

नया भवन बनाने की मांग तेज

एकीकृत बाल विकास परियोजना विजयराघवगढ़ के अंतर्गत आने वाले इस केंद्र को लेकर वार्ड क्रमांक-6 के नागरिक लगातार नए और सुरक्षित भवन की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब तक नया भवन नहीं बनेगा, तब तक बच्चों और महिलाओं की जान खतरे में बनी रहेगी।


 प्रशासनिक नियम और जिम्मेदारी

आंगनवाड़ी केंद्रों के संचालन, भवन सुरक्षा और स्वच्छता से संबंधित नियम महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा निर्धारित किए गए हैं। इन नियमों और प्रक्रियाओं की जानकारी विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।


 जनता के सवाल, प्रशासन की चुप्पी

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह लापरवाही किसी गंभीर दुर्घटना में बदल सकती है।

 उम्मीद अभी बाकी है

जनता को अब भी उम्मीद है कि जिम्मेदार अधिकारी जल्द संज्ञान लेंगे और बच्चों के लिए सुरक्षित, स्वच्छ और सम्मानजनक आंगनवाड़ी भवन की व्यवस्था करेंगे। आखिरकार, देश का भविष्य कहे जाने वाले इन मासूमों को डर और गंदगी के साए में पढ़ने के लिए कब तक मजबूर रहना पड़ेगा—यह सवाल पूरे समाज के सामने है।


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प्रशासनिक प्रतिक्रिया

इस मामले में जब विजयराघवगढ़ में पदस्थ महिला एवं बाल विकास विभाग की सीपीडीओ संतोष अग्रवाल से Public News and Views के संपादक आदिल अज़ीज़ ने बातचीत की, तो उन्होंने बताया कि—

“मामले की पूरी जानकारी प्राप्त हुई है। संबंधित आंगनवाड़ी केंद्र की स्थिति को लेकर शीघ्र ही स्थल पर जाकर जांच कराई जाएगी। जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार उचित कदम उठाए जाएंगे।”

सीपीडीओ द्वारा दिए गए इस बयान के बाद अब क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि जर्जर आंगनवाड़ी भवन को लेकर प्रशासन जल्द ठोस कार्रवाई करेगा और बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।

Written & Edited By : ADIL AZIZ

Report : SUNIL SIGOTE 

(जनहित की बात, पत्रकारिता के साथ)
📧 Email : publicnewsviews1@gmail.com
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