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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सख्ती: बिना सम्मति और नवीनीकरण चल रहे 10 उद्योग बंद, कलेक्टर आशीष तिवारी के निर्देश पर बड़ी कार्यवाही

 

बिना अनुमति चल रहे 10 उद्योग बंद, कटनी में बड़ी कार्रवाई 

कटनी में पर्यावरण नियमों की अनदेखी पर प्रशासन का कड़ा रुख



कटनी (05 फरवरी) — जिले में पर्यावरण संरक्षण को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्यवाही की है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सम्मति और नवीनीकरण के बिना संचालित हो रहे 10 औद्योगिक इकाइयों को बंद करने के निर्देश जारी किए गए हैं। यह कार्यवाही कलेक्टर आशीष तिवारी के स्पष्ट निर्देशों के पालन में मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, कटनी द्वारा की गई है।

इस कदम को जिले में बढ़ते वायु प्रदूषण पर नियंत्रण की दिशा में एक महत्वपूर्ण और निर्णायक पहल माना जा रहा है। प्रशासन ने साफ संकेत दे दिया है कि पर्यावरणीय नियमों से समझौता किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।




बिना अनुमति चल रहे उद्योग बने प्रदूषण का कारण

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी सुधांशु तिवारी ने जानकारी देते हुए बताया कि जिन औद्योगिक इकाइयों पर कार्यवाही की गई है, वे लंबे समय से बोर्ड की आवश्यक सम्मति और उसके नवीनीकरण के बिना संचालित हो रही थीं। इन इकाइयों द्वारा न तो वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया गया और न ही प्रभावी प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्थाएं स्थापित की गई थीं।

इन उद्योगों से निकलने वाले धूल कण, गैस और अन्य प्रदूषक तत्व आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण को बढ़ा रहे थे, जिससे आम नागरिकों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था।


इन 10 उद्योगों को जारी हुए बंद करने के निर्देश

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जिन 10 औद्योगिक इकाइयों को तत्काल प्रभाव से उद्योग प्रक्रिया बंद करने के निर्देश जारी किए गए हैं, उनमें शामिल हैं—

  1. मेसर्स विनय लाइम इंडस्ट्री, पठरा झुकेही

  2. मेसर्स परोहा स्टोन लाइम कंपनी, झुकेही

  3. मेसर्स शिवांश इंडस्ट्री (पूर्व नाम रुद्राक्ष लाइम इंडस्ट्री), पडखुरी

  4. मेसर्स शंकरलाल सतेंद्र कुमार जैन, मझगवां

  5. मेसर्स एस.बी.एस. रिफ्रैक्ट्री, भरौली

  6. मेसर्स चंदन सेरामिक, लिगरी

  7. मेसर्स चंदन मिनरल्स एंड रिफ्रैक्ट्री, लखापतेरी

  8. मेसर्स बालाजी ट्रेडर्स, भरौली

  9. मेसर्स बी.टी. मिनरल्स, बड़ागांव

  10. मेसर्स ड्राई टेक प्रोडक्ट, पठरा

इन सभी इकाइयों पर एक समान रूप से नियमों की अवहेलना का आरोप पाया गया।


वायु अधिनियम 1981 और जल अधिनियम 1974 का उल्लंघन

नियमानुसार किसी भी औद्योगिक इकाई को उत्पादन कार्य प्रारंभ करने से पहले प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम 1981 और जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम 1974 के अंतर्गत सम्मति लेना और उसका समय-समय पर नवीनीकरण कराना अनिवार्य होता है।

जांच में सामने आया कि इन 10 उद्योगों ने न केवल सम्मति नहीं ली थी, बल्कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए आवश्यक तकनीकी व्यवस्थाएं भी स्थापित नहीं की थीं। यह सीधे तौर पर पर्यावरणीय कानूनों का उल्लंघन है।


धारा 33(क) और 31(क) के तहत कार्रवाई

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दोषी पाए गए पहलुओं के आधार पर जल अधिनियम 1974 की धारा 33(क) और वायु अधिनियम 1981 की धारा 31(क) के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए इन सभी इकाइयों को बंद करने के आदेश जारी किए हैं।

यह धाराएं बोर्ड को यह अधिकार देती हैं कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली इकाइयों पर तत्काल रोक लगाई जा सके।


बिजली कनेक्शन काटने और शासकीय सुविधाएं बंद करने के निर्देश

सिर्फ उद्योग बंद करने तक ही प्रशासन ने खुद को सीमित नहीं रखा। विद्युत विभाग के अधीक्षण यंत्री को निर्देश दिए गए हैं कि इन सभी इकाइयों के विद्युत कनेक्शन तत्काल प्रभाव से विच्छेदित किए जाएं।

इसके साथ ही खनिज एवं उद्योग विभाग को भी निर्देश दिए गए हैं कि संबंधित फर्मों को मिलने वाली सभी शासकीय सुविधाएं बंद की जाएं, ताकि बिना अनुमति संचालन की कोई संभावना न बचे।


जनस्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता

यह कार्यवाही न केवल कानून के पालन की दिशा में एक मजबूत कदम है, बल्कि यह आम जनता के स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रशासन की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है। लगातार बढ़ता वायु प्रदूषण सांस संबंधी बीमारियों, आंखों की समस्या और अन्य स्वास्थ्य जोखिमों को जन्म दे रहा है।

प्रशासन का यह संदेश स्पष्ट है कि औद्योगिक विकास आवश्यक है, लेकिन पर्यावरण की कीमत पर नहीं।


अन्य उद्योगों के लिए चेतावनी और संदेश

कटनी जिले में संचालित अन्य औद्योगिक इकाइयों के लिए यह कार्यवाही एक चेतावनी के रूप में देखी जा रही है। यदि समय रहते नियमों का पालन नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में और भी कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में निरीक्षण अभियान और अधिक सघन किए जाएंगे।


 नियमों के साथ उद्योग, तभी टिकाऊ विकास

कटनी में की गई यह कार्यवाही यह साबित करती है कि अब पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी करना आसान नहीं होगा। उद्योगों को चाहिए कि वे नियमों के अनुरूप कार्य करें, आवश्यक सम्मतियां लें और प्रदूषण नियंत्रण के प्रभावी उपाय अपनाएं।

सतत विकास का रास्ता तभी संभव है जब उद्योग, प्रशासन और समाज मिलकर पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी निभाएं।


Written & Edited By :
ADIL AZIZ
(जनहित की बात, पत्रकारिता के साथ)
PUBLIC SAB JANTI HAI
Email : publicnewsviews1@gmail.com


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