फर्जी मार्कशीट से पेट्रोल पंप लेने का मामला उजागर, कटनी न्यायालय के आदेश पर आरोपी पर गंभीर धाराओं में केस दर्ज
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कटनी। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पेट्रोल पंप हासिल करने का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने न केवल प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि जागरूक नागरिक और न्यायालय सक्रिय हों, तो बड़े से बड़ा फर्जीवाड़ा भी उजागर हो सकता है। रीठी क्षेत्र में गोपाल फिलिंग के नाम से संचालित पेट्रोल पंप के आवंटन को लेकर सामने आए इस प्रकरण में न्यायालय के आदेश पर आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
क्या है पूरा मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार सुभांशु नगरिया, निवासी डन कॉलोनी, मदन मोहन चौबे वार्ड, कटनी द्वारा फर्जी एवं कूट रचित शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड से पेट्रोल पंप प्राप्त किया गया था। यह पेट्रोल पंप रीठी क्षेत्र में गोपाल फिलिंग के नाम से संचालित किया जा रहा था।
वर्ष 2015 में भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड द्वारा पेट्रोल पंप आवंटन के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे। इसी प्रक्रिया के तहत आरोपी ने अपने आवेदन के साथ तमिलनाडु विश्वविद्यालय से परीक्षा उत्तीर्ण करने की एक मार्कशीट संलग्न की थी। इन दस्तावेजों को सत्य मानते हुए बीपीसीएल द्वारा पेट्रोल पंप का आवंटन कर दिया गया।
आरटीआई एक्टिविस्ट की सतर्कता से खुला राज
इस पूरे मामले का खुलासा समाजसेवी एवं आरटीआई एक्टिविस्ट सुनील सेन की सक्रियता से हुआ। उन्हें जब पेट्रोल पंप के आवंटन से संबंधित दस्तावेजों की जानकारी प्राप्त हुई, तो उन्हें प्रस्तुत की गई मार्कशीट पर संदेह हुआ।
सुनील सेन द्वारा इस संबंध में भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड में विधिवत शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत के आधार पर बीपीसीएल द्वारा आंतरिक जांच कराई गई, जिसमें यह तथ्य सामने आया कि आरोपी द्वारा प्रस्तुत की गई मार्कशीट फर्जी है। जांच में शिकायत को सही पाए जाने के बाद बीपीसीएल ने पेट्रोल पंप का आवंटन तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया।
पुलिस की निष्क्रियता, न्यायालय की शरण
पेट्रोल पंप का आवंटन निरस्त होने के बावजूद जब इस गंभीर अपराध में पुलिस स्तर पर कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई, तो शिकायतकर्ता सुनील सेन ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
फरियादी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मिथलेश जैन ने न्यायालय में पूरे मामले के तथ्यों और साक्ष्यों को मजबूती से प्रस्तुत किया। उन्होंने तर्क दिया कि आरोपी द्वारा न केवल फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए, बल्कि उन्हें एक सार्वजनिक उपक्रम में प्रस्तुत कर लाभ अर्जित किया गया, जो गंभीर आपराधिक कृत्य है।
न्यायालय का सख्त रुख
न्यायालय, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, कटनी ने शिकायतकर्ता सुनील सेन एवं भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड के क्षेत्रीय प्रबंधक, जबलपुर के बयान एवं प्रस्तुत दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 467 (कीमती दस्तावेज की जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी) एवं 471 (जाली दस्तावेज का उपयोग) के तहत अपराध पंजीबद्ध करने का आदेश जारी किया।
यह आदेश न केवल इस प्रकरण में महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि न्यायालय ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।
बीपीसीएल की जांच और जवाबदेही
भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड द्वारा की गई जांच इस बात का प्रमाण है कि यदि शिकायतें गंभीरता से ली जाएं, तो बड़े संस्थानों में भी पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सकती है। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि दस्तावेजों की प्रारंभिक जांच में हुई चूक के कारण पेट्रोल पंप का आवंटन हो सका, लेकिन बाद में शिकायत मिलने पर कंपनी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आवंटन निरस्त किया।
यह मामला भविष्य में पेट्रोल पंप आवंटन प्रक्रियाओं में और अधिक सख्ती एवं दस्तावेजों के गहन सत्यापन की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
समाज के लिए संदेश
यह पूरा घटनाक्रम समाज के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश देता है कि यदि कोई व्यक्ति गलत तरीके से लाभ अर्जित करता है, तो वह लंबे समय तक कानून की नजर से बच नहीं सकता। वहीं, यह मामला आरटीआई एक्टिविस्ट और जागरूक नागरिकों की भूमिका को भी उजागर करता है, जिनकी सक्रियता से ऐसे फर्जीवाड़े सामने आते हैं।
न्यायालय का यह आदेश उन लोगों के लिए भी चेतावनी है, जो फर्जी दस्तावेजों के सहारे सरकारी या सार्वजनिक उपक्रमों से लाभ लेने की कोशिश करते हैं।
रीठी पेट्रोल पंप प्रकरण यह साबित करता है कि सत्य चाहे देर से ही सही, लेकिन सामने जरूर आता है। फर्जी मार्कशीट के आधार पर प्राप्त किया गया पेट्रोल पंप न केवल आरोपी के लिए कानूनी संकट बन गया, बल्कि यह मामला प्रशासनिक तंत्र की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी एक उदाहरण बन गया है।
आने वाले समय में इस प्रकरण की कानूनी कार्यवाही पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कानून अपना पूरा असर दिखाते हुए दोषी को किस हद तक सजा दिला पाता है।
Written & Edited By : ADIL AZIZ
(जनहित की बात, पत्रकारिता के साथ)
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