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कृषि नवाचार से आत्मनिर्भरता की मिसाल: कटनी के किसान कपूरा चौधरी टमाटर खेती से कमा रहे 5 लाख सालाना


कटनी जिले के अमगवा गांव के किसान कपूरा चौधरी ने ड्रिप मल्चिंग तकनीक से टमाटर खेती कर सालाना 5–6 लाख की आय अर्जित कर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की।



कटनी के किसान ने टमाटर खेती से बदली किस्मत


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🧑‍🌾 कृषि के क्षेत्र में किसान नवाचारों से पेश कर रहे आत्मनिर्भरता की मिसाल

📍 अमगवा के प्रगतिशील कृषक कपूरा चौधरी टमाटर की खेती से कमा रहे 5 लाख रुपये सालाना

कटनी | 07 फरवरी
प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इस पहल का सकारात्मक प्रभाव अब ज़मीनी स्तर पर दिखाई देने लगा है। किसान परंपरागत खेती से आगे बढ़कर आधुनिक तकनीकों को अपनाते हुए न केवल अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं, बल्कि कृषि को एक लाभकारी व्यवसाय के रूप में भी स्थापित कर रहे हैं।

कटनी जिले के बहोरीबंद विकासखंड अंतर्गत ग्राम अमगवा, इंद्रा कॉलोनी डिहुटा निवासी प्रगतिशील कृषक कपूरा चौधरी ने आधुनिक कृषि नवाचार अपनाकर आत्मनिर्भरता की एक सशक्त मिसाल पेश की है।


🌱 ड्रिप मल्चिंग तकनीक से बदली खेती की तस्वीर 

कपूरा चौधरी ने पारंपरिक गेहूं और धान की खेती से आगे बढ़ते हुए ड्रिप मल्चिंग तकनीक के माध्यम से टमाटर की खेती शुरू की। यह तकनीक कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाली मानी जाती है, जिससे लागत घटती है और उत्पादन बढ़ता है


ड्रिप मल्चिंग तकनीक से टमाटर की खेती करते किसान कपूरा चौधरी


💰 तीन एकड़ में खेती, हर सीजन 5–6 लाख की आमदनी 

किसान कपूरा चौधरी के पुत्र सोनू चौधरी ने बताया कि उन्होंने तीन एकड़ भूमि में ड्रिप मल्चिंग से टमाटर की खेती शुरू की। इसके परिणामस्वरूप उन्हें हर सीजन में 5 से 6 लाख रुपये तक की आमदनी हो रही है।

🔹 लागत और मुनाफे का गणित (H3)

  • ड्रिप मल्चिंग वार्षिक खर्च: लगभग ₹1,00,000

  • टमाटर खेती की लागत: ₹25,000–30,000 प्रति एकड़

  • औसत सीजन आय: ₹5–6 लाख

सोनू चौधरी बताते हैं कि बाजार भाव के अनुसार आमदनी में उतार-चढ़ाव रहता है, लेकिन फिर भी यह खेती पारंपरिक फसलों की तुलना में कहीं अधिक लाभदायक है।


🥬 अन्य सब्जियों की खेती से भी हो रही अतिरिक्त आय 

टमाटर के साथ-साथ कपूरा चौधरी परिवार गोभी, मूली, मटर तथा गर्मी के मौसम में खीरा जैसी सब्जियों की खेती भी करता है। इससे जोखिम कम होता है और सालभर आय के स्रोत बने रहते हैं।


कटनी जिले में सब्जी उत्पादन करते नवाचारी किसान



🌍 कटनी का टमाटर: स्वाद और गुणवत्ता की पहचान 

कटनी जिले की भौगोलिक परिस्थितियाँ टमाटर उत्पादन के लिए अत्यंत अनुकूल मानी जाती हैं। यहां उत्पादित टमाटर:

  • स्वाद में बेहतर

  • लंबे समय तक टिकाऊ

  • मंडियों में अधिक मांग वाला

जबलपुर, शहडोल सहित आसपास के जिलों की कृषि उपज मंडियों में कटनी के टमाटर की विशेष पहचान है।


📊 आंकड़ों में कटनी का टमाटर उत्पादन 

हार्टीकल्चर एरिया प्रोडक्शन इंफॉर्मेशन सिस्टम (HAPIS) के अनुसार:

  • टमाटर रकबा: 3,110 हेक्टेयर

  • अनुमानित उत्पादन: 500–600 मैट्रिक टन

ये आंकड़े दर्शाते हैं कि टमाटर उत्पादन जिले की अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभा रहा है।

🔗 External Link (Official Source):
कृषि एवं उद्यानिकी योजनाओं की जानकारी के लिए मध्यप्रदेश उद्यानिकी विभाग की आधिकारिक वेबसाइट देखें।


🏛️ प्रशासन का प्रोत्साहन और मार्गदर्शन 

कलेक्टर आशीष तिवारी ने कृषि और उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जिले के किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाए और टमाटर फसल क्षेत्र में वृद्धि की जाए।

उद्यानिकी विभाग की टीम ने कपूरा चौधरी के खेत का निरीक्षण कर अपनाई गई तकनीकों की सराहना भी की।


🌟 अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत 

कपूरा चौधरी की यह सफलता यह संदेश देती है कि:

  • नवाचार

  • आधुनिक तकनीक

  • सही मार्गदर्शन

  • मेहनत

इनके माध्यम से कृषि को लाभ का व्यवसाय बनाया जा सकता है। वे वास्तव में एक नवाचारी किसान हैं।


कटनी और आसपास के क्षेत्रों की ताज़ा स्थानीय खबरों के लिए पढ़ें:
🔗 https://www.publicnewsandviews.in


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✍️ Written & Edited By : ADIL AZIZ

(जनहित की बात, पत्रकारिता के साथ) PUBLIC SAB JANTI HAI
📧 Email : publicnewsviews1@gmail.com

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