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कटनी में प्रधानमंत्री आवास योजना पर हल्ला बोल: अधूरी मूलभूत सुविधाओं और घटिया निर्माण से परेशान जनता, युवा कांग्रेस ने दिया दस दिन का अल्टीमेटम

 


कटनी में प्रधानमंत्री आवास योजना पर सवाल: अधूरी सुविधाओं और घटिया निर्माण से परेशान लोग

कटनी। प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराना है, ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें। लेकिन कटनी नगर निगम क्षेत्र में इस योजना के तहत बने घर आज गरीब परिवारों की परेशानी का सबब बन गए हैं। योजना की जमीनी हकीकत का हाल जानकर यही लगता है कि प्रशासनिक लापरवाही और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर ध्यान न देने से गरीब जनता के सपनों का ‘आवास’ अधूरा रह गया है।

आवंटन के बाद भी अधूरी सुविधाएँ

नगर वार्ड क्रमांक 18 में बनाए गए प्रधानमंत्री आवास योजना के घरों में अब तक मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। लाभार्थियों को गृह प्रवेश तो करा दिया गया, लेकिन आज दिनांक तक वहां पानी और बिजली जैसी जरूरी सेवाओं की कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं है।

गरीब परिवारों को मजबूरी में किराये के मकान में रहना पड़ रहा है और ऊपर से बैंक की किस्त का बोझ भी उठाना पड़ रहा है। ऐसे हालात में यह योजना लोगों के लिए राहत के बजाय परेशानी का कारण बनती दिख रही है।

घटिया निर्माण की पोल खोलती दीवारें

लोगों ने नगर निगम और प्रशासन को कई बार शिकायतें कीं, यहां तक कि सीएम हेल्पलाइन तक भी बात पहुंचाई गई, लेकिन कार्रवाई अब तक ठोस स्तर पर नहीं हुई। शिकायतकर्ताओं के मुताबिक बनाए गए घरों की गुणवत्ता बेहद खराब है।

  • दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें

  • प्लास्टर उखड़ना

  • छत से सीलन

  • निम्न स्तर की सामग्री का उपयोग

इन समस्याओं से साफ है कि निर्माण कार्य में भारी लापरवाही बरती गई है। लाभार्थियों ने तो यहां तक कहा है कि उन्हें मिलने वाले घर ‘आश्रय’ कम और ‘मुसीबत’ ज्यादा बन चुके हैं।

कांग्रेस युवाओं ने उठाई आवाज

कटनी युवा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष दिव्यांशु मिश्रा अंशु ने नगर निगम को लिखित शिकायत भेजी है। उन्होंने कहा कि गरीब जनता की परेशानी को अनदेखा नहीं किया जा सकता। यदि दस दिनों के भीतर समस्या का समाधान नहीं किया गया और निर्माण की उच्च स्तरीय जांच शुरू नहीं हुई तो कांग्रेस युवा मोर्चा सड़क पर उतरकर आंदोलन करेगा।

उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि गरीब जनता को उनका अधिकार दिलाने के लिए कांग्रेस हर स्तर पर संघर्ष करेगी।

प्रशासन की चुप्पी और जनता की बेबसी

सबसे बड़ी विडंबना यह है कि सांसद, विधायक, महापौर सहित सभी जनप्रतिनिधियों तक शिकायत पहुंचाने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। जनता अपने हक के लिए दर-दर की ठोकरें खा रही है, जबकि जिम्मेदार विभाग चुप्पी साधे बैठे हैं।

यह सवाल उठना लाजमी है कि जब करोड़ों रुपये खर्च कर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर बनाए जाते हैं, तो फिर उनकी गुणवत्ता की जांच कौन करता है? गरीबों के हक का पैसा आखिर किस जेब में जा रहा है?

न्याय की मांग और चेतावनी

दिव्यांशु मिश्रा अंशु ने कहा कि यदि गरीबों की समस्याओं का त्वरित समाधान नहीं हुआ तो वे कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाएंगे। इस मामले की पूरी जिम्मेदारी नगर निगम कटनी की होगी।

जनता के हक का सवाल

प्रधानमंत्री आवास योजना गरीबों के सपनों को पंख देने के लिए शुरू की गई थी, लेकिन कटनी की यह तस्वीर बताती है कि योजना का मकसद यहां अधूरा रह गया है। भ्रष्टाचार और लापरवाही के कारण गरीबों के हिस्से का घर उनके लिए सिरदर्द बन गया है।

आज जरूरत है कि जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर वास्तविकता देखें और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करें। गरीब जनता को सिर्फ ‘कागजी योजनाओं’ की नहीं, बल्कि ज़मीनी हक की जरूरत है।



कटनी में प्रधानमंत्री आवास योजना पर हल्ला बोल: अधूरी मूलभूत सुविधाओं और घटिया निर्माण से परेशान जनता, युवा कांग्रेस ने दिया दस दिन का अल्टीमेटम

कटनी। प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को पक्के मकान उपलब्ध कराना है ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें। लेकिन कटनी नगर निगम क्षेत्र में इस योजना की हकीकत इससे बिलकुल अलग है। आवंटित मकानों में न तो बिजली की सुविधा है और न ही पानी की। ऊपर से घटिया निर्माण ने गरीब परिवारों की उम्मीदों को चकनाचूर कर दिया है।

इन मुद्दों को लेकर युवा कांग्रेस ने नगर निगम कार्यालय का घेराव किया और जमकर नारेबाजी करते हुए नगर निगम आयुक्त को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी शामिल हुए और अपनी समस्याएँ प्रशासन के सामने रखीं।










अधूरी मूलभूत सुविधाएँ: मकान है लेकिन रहने की सुविधा नहीं

प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत वार्ड क्रमांक 18 और अन्य इलाकों में तैयार मकान आवंटित कर दिए गए, चाबियाँ भी गरीब परिवारों को सौंप दी गईं, लेकिन आज तक उन मकानों में न तो बिजली की लाइनें ठीक से जुड़ीं और न ही पानी की टंकियां।

लोगों का कहना है कि वे मजबूरी में किराए के मकानों में रहने को विवश हैं और ऊपर से बैंक की ईएमआई की किस्त चुकाना पड़ रही है। यानी गरीब जनता पर दोहरा बोझ पड़ रहा है – किराया और बैंक की किश्त दोनों


घटिया निर्माण की हकीकत: दरारें, सीलन और उखड़ती टाइल्स

शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि मकानों का निर्माण पूरी तरह गुणवत्ताविहीन है।

  • दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ चुकी हैं।

  • टाइल्स और पाइप उखड़ने लगे हैं।

  • छत से पानी टपक रहा है।

  • प्लास्टर झड़ रहा है।

युवा कांग्रेस अध्यक्ष दिव्यांशु मिश्रा अंशु ने आयुक्त को तस्वीरों के साथ सबूत भी सौंपे। उनका कहना था कि अगर प्रशासन समय रहते जांच कराता तो आज ये स्थिति नहीं होती।


बार-बार की शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं

स्थानीय लोगों ने बताया कि वे कई बार सांसद, विधायक और महापौर तक अपनी बात रख चुके हैं। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में भी शिकायत दर्ज कराई गई, लेकिन अब तक किसी ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

जनता का सवाल है कि जब करोड़ों रुपए खर्च करके प्रधानमंत्री आवास योजना के मकान बनाए गए तो उनकी गुणवत्ता की जांच क्यों नहीं की गई? और अगर की गई, तो फिर ऐसे घटिया निर्माण की अनुमति कैसे दी गई?


युवा कांग्रेस का अल्टीमेटम: दस दिन में समाधान, वरना आंदोलन

दिव्यांशु मिश्रा अंशु ने नगर निगम प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि 10 दिनों के भीतर मकानों में बिजली और पानी की सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई और निर्माण में आई खामियों की मरम्मत नहीं की गई, तो युवा कांग्रेस उग्र आंदोलन करेगी।

उन्होंने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ गरीब जनता के हक की है और कांग्रेस इसे सड़क से लेकर कोर्ट तक लड़ेगी।


प्रदर्शन में गूंजे नारे, जनता की आवाज बनी कांग्रेस

नगर निगम कार्यालय के बाहर हुए प्रदर्शन में युवा कांग्रेस के साथ शहर कांग्रेस अध्यक्ष अमित शुक्ला, वरिष्ठ पार्षद मौसूफ अहमद बिट्टू, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष कमल पांडेय, पार्षद विनीत जायसवाल, ओबीसी कांग्रेस अध्यक्ष नारायण निषाद सहित अनेक नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

प्रदर्शन में शामिल पीड़ित परिवारों ने भी अपनी समस्याएँ खुलकर बताईं और कहा कि अब वे चुप नहीं बैठेंगे।


जनता का सवाल: जिम्मेदार कौन?

  • क्या नगर निगम प्रशासन इस लापरवाही की जिम्मेदारी लेगा?

  • क्या घटिया निर्माण कराने वाले ठेकेदारों पर कोई कार्रवाई होगी?

  • गरीब जनता को कब तक मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा जाएगा?

इन सवालों का जवाब प्रशासन को जल्द देना होगा, वरना जनता और विपक्ष की संयुक्त ताकत आंदोलन को और मजबूत बना देगी।


भ्रष्टाचार पर उठते सवाल

लोगों का कहना है कि योजना के नाम पर करोड़ों का बजट जारी होता है, लेकिन जमीनी स्तर पर सुविधाएँ क्यों नहीं मिलतीं? यह सवाल भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। अगर ईमानदारी से काम हुआ होता तो मकान गरीबों के लिए वरदान साबित होते, अभिशाप नहीं।




 जनता जाग चुकी है

कटनी की यह तस्वीर बताती है कि जनता अब जाग चुकी है। वह अपने हक के लिए आवाज बुलंद कर रही है और जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांग रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना का मकसद तभी पूरा होगा जब गरीबों को रहने के लिए मकान ही नहीं, बल्कि उसमें जीने के लिए मूलभूत सुविधाएँ भी मिलें।












✍️ Written & Edited By : ADIL AZIZ
(जनहित की बात, पत्रकारिता के साथ)
📧 Email : publicnewsviews1@gmail.com



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